CBSE बोर्ड परीक्षा में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और बोर्ड से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएसई और केंद्र सरकार से पूछा कि क्या कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में छात्रों को कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है।

कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षाओं में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की मांग अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), NCERT और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। यह पूरी कवायद एक जनहित याचिका (PIL) के बाद शुरू हुई है, जिसमें छात्रों के मानसिक बोझ को कम करने और समय बचाने की बात कही गई है।
यह याचिका पीतमपुरा निवासी विशाल दुआ और 10 अन्य अभिभावकों ने अधिवक्ता नितिन मंगला के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अकाउंटेंसी और गणित जैसे विषयों में छात्रों को लंबी और जटिल गणनाओं (calculations) में बहुत अधिक समय देना पड़ता है। इस वजह से उन्हें अपने कॉन्सेप्ट्स और विषय की समझ को बेहतर तरीके से पेश करने का मौका नहीं मिल पाता।
अकाउंटेंसी परीक्षा में कैलकुलेटर की अनुमति की मांग
याचिका में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह उठाया गया है कि सीबीएसई की अपनी करिकुलम कमेटी ने नवंबर 2024 में हुई 70वीं बैठक में अकाउंटेंसी की परीक्षा में बेसिक, नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद यह प्रस्ताव दिसंबर 2024 में सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी के सामने भी रखा गया था। लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि काफी समय बीत जाने के बाद भी इस सिफारिश को लागू नहीं किया गया है।
इसके अलावा, याचिका में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 का हवाला देते हुए कहा गया है कि शिक्षा का जोर अब रटने के बजाय वैचारिक समझ और उच्च स्तरीय सोच (higher-order thinking) पर होना चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि कैलकुलेटर की सुविधा, जो वर्तमान में केवल डिस्केलकुलिया (dyscalculia) से जूझ रहे छात्रों को मिलती है, उसे अन्य दिव्यांग श्रेणियों के छात्रों के लिए भी बढ़ाया जाए।
बता दें कि याचिकाकर्ताओं ने अगस्त 2026 में इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को एक विस्तृत आवेदन दिया था, लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया है।