'Bring Back Ballot' इंस्टाग्राम हैंडल ब्लॉक करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने 'Bring Back Ballot' इंस्टाग्राम हैंडल को ब्लॉक करने के मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह मामला इंस्टाग्राम हैंडल 'Bring Back Ballot' को भारत में ब्लॉक किए जाने के खिलाफ दायर एक याचिका से जुड़ा है। अदालत ने इस कार्रवाई पर केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस अकाउंट को प्रतिबंधित करने का आधार क्या था।
यह इंस्टाग्राम हैंडल 'मिशन सेव कॉन्स्टिट्यूशन' और उनके राष्ट्रीय संयोजक वकील महमूद प्राचा की एक पहल है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस हैंडल को 10 अक्टूबर को तब ब्लॉक किया गया, जब वे जंतर मंतर पर एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले थे। जस्टिस अमित महाजन ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।
बिना नोटिस और सुनवाई के अकाउंट ब्लॉक करने का आरोप
अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से वकील सनावर चौधरी ने दलील दी कि 10 अक्टूबर को जब जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन होना था, तभी अचानक हैंडल पर यह मैसेज आने लगा कि "अकाउंट भारत में उपलब्ध नहीं है, क्योंकि हमने इस कंटेंट को प्रतिबंधित करने के कानूनी अनुरोध का पालन किया है।" याचिका में कहा गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में याचिकाकर्ताओं को न तो कोई नोटिस दिया गया, न ही उनकी बात सुनी गई और न ही किसी आदेश की कॉपी दी गई।
इस हैंडल के जरिए "ईवीएम हटाओ देश बचाओ" के नारे के साथ भारतीय चुनावों में वापस पेपर बैलेट (कागजी मतपत्र) लाने की वकालत की जा रही थी। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि वोटिंग के तरीके में बदलाव की मांग करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित राजनीतिक अभिव्यक्ति है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस अकाउंट को 50,000 से अधिक फॉलोअर्स थे। किसी एक पोस्ट के बजाय पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना असंगत और अनुचित है। साथ ही, यह सवाल भी उठाया गया है कि सरकार की ऐसी कौन सी प्रकाशित पॉलिसी या गाइडलाइन है, जिसके आधार पर पूरे अकाउंट को ब्लॉक करने का निर्देश दिया जाता है।
सुनवाई के दौरान मेटा प्लेटफॉर्म की ओर से वकील अमी राणा और केंद्र सरकार की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल आशीष दीक्षित पेश हुए, जिन्होंने संबंधित मंत्रालयों की ओर से नोटिस स्वीकार किया।