विरोध प्रदर्शनों में पुलिस के बॉडी वorn कैमरा इस्तेमाल पर दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र को निर्देश

Kittu Kumari7 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
विरोध प्रदर्शनों में पुलिस के बॉडी वorn कैमरा इस्तेमाल पर दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र को निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि वह विरोध प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा बॉडी वorn कैमरा के अनिवार्य उपयोग के प्रस्ताव पर विचार करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले को केवल एक 'ग्रे एरिया' मानकर न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, बल्कि इसे एक आधिकारिक प्रतिनिधित्व (representation) के तौर पर देखा जाना चाहिए।

यह मामला चाहत राघव द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें मांग की गई थी कि दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के लिए प्रदर्शनों के दौरान बॉडी वorn कैमरों का उपयोग अनिवार्य किया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों के व्यवहार पर भी नजर रखी जा सकेगी, जिससे जवाबदेही तय होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

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याचिका की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने दलील दी कि अक्सर विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर ज्यादती के आरोप लगते हैं और बदले में पुलिस प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाती है। ऐसी स्थिति में बॉडी वorn कैमरे एक निष्पक्ष सबूत के तौर पर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि कुछ स्थितियों में इनका इस्तेमाल होता है, लेकिन यह बहुत छिटपुट है और इसके लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल और फ्रेमवर्क की जरूरत है, जिसमें फुटेज के स्टोरेज और उसकी सुरक्षा के नियम शामिल हों।

दूसरी ओर, कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि जब विधायिका पहले से ही पुलिस प्रक्रियाओं को विनियमित करने के लिए वैधानिक प्रावधान बना रही है, तो न्यायिक आदेश की आवश्यकता क्यों है? एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन सांभ्रे की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह मामला केवल दिल्ली पुलिस तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पुलिसिंग सिस्टम से जुड़ा है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही जंतर मंतर पर प्रदर्शनों के संबंध में SOP बनाने के निर्देश दिए हैं और वर्तमान व्यवस्था में वीडियोग्राफी का प्रावधान है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने इस बात को खारिज करते हुए कहा कि सामान्य वीडियोग्राफी और बॉडी वorn कैमरा में बड़ा अंतर है।

अंत में, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह बॉडी वorn कैमरों के उपयोग के संबंध में SOP बनाने पर अपने फैसले की जानकारी छह महीने के भीतर दे। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह छूट भी दी है कि यदि सरकार की कार्रवाई से वे संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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