दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ज ज्स के इनकम टैक्स रिटर्न पर लगाई रोक

दिल्ली NCR के पाठकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को प्रोसेस करने से रोक दिया है। यह आदेश 22 जुलाई 2026 को जारी किया गया है, जो सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) के एक ऑफिस मेमोरेंडम को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। इस मामले की पुष्टि ANI update से हुई है।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने जजों के टैक्स रिटर्न प्रोसेसिंग पर लगाई रोक।
- विवाद 12 सितंबर 2025 के CBDT ऑफिस मेमोरेंडम से जुड़ा है।
- अगली सुनवाई अब 3 सितंबर 2026 को तय की गई है।
विवाद की मुख्य वजह और नए टैक्स नियम
यह पूरा विवाद 12 सितंबर 2025 को जारी किए गए CBDT के एक ऑफिस मेमोरेंडम से शुरू हुआ है। इस मेमोरेंडम में आरोप लगाया गया है कि जिन जजों ने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 115BAC(1A) के तहत नए टैक्स régimen को चुना है, उन्हें रेंट-फ्री अकोमोडेशन, कन्वेंस, समप्टुएरी अलाउंस और लीव ट्रैवल कंसिस्टेंसी जैसे भत्तों पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। CBDT का तर्क था कि नए régimen में कम टैक्स दरों को देखते हुए ये लाभ देना "डबल बेनिफिट" होगा। हालांकि, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जजों (सैलरी एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस) एक्ट्स के सेक्शन 22D और 23D साफ कहते हैं कि ये भत्ते टैक्सेबल नहीं हैं और इन्हें सैलरी इनकम में शामिल नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट का अंतरिम आदेश और आगे की प्रक्रिया
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने अपने interim order में कहा है कि नए टैक्स régimen के आने के बावजूद सेक्शन 22D और 23D के तहत मिलने वाले सुरक्षा कवच लागू रह सकते हैं। कोर्ट ने जजों को छूट दी है कि वे ई-फाइलिंग पोर्टल के "Exempt Income" टैब में इन न्यायिक भत्तों को "receipts not in the nature of income" के तौर पर दर्ज करके अपने रिटर्न फाइल कर सकते हैं, लेकिन साफ निर्देश दिए हैं कि इन रिटर्न को प्रोसेस न किया जाए। याचिकाकर्ता दिल्ली टैक्स बार एसोसिएशन ने तर्क दिया कि इन कानूनी छूटों को नकारना जजों के वेतन की सुरक्षा करने वाले संवैधानिक अनुच्छेदों का उल्लंघन है। इस मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर 2026 को होगी।