दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच का बड़ा फैसला, JNU को 'डिप्राइवेशन पॉइंट्स' के साथ एडमिशन जारी रखने की मिली अनुमति

दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को एक अंतरिम आदेश में संशोधन किया है। इस बेंच का नेतृत्व चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया ने किया। कोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) को 2026-27 के एकेडमिक सेशन के लिए अपनी पुरानी 'डिप्राइवेशन पॉइंट्स' (deprivation points) नीति के साथ पोस्टग्रेजुएटिंग एडमिशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने मामले की सुनवाई कर रहे सिंगल जज को कार्यवाही में तेजी लाने का निर्देश दिया है, और इस मामले की अगली सुनवाई अब 24 अगस्त 2026 के लिए तय की गई है।
सिंगल जज के आदेश में संशोधन
यह फैसला 14 अगस्त 2026 को जस्टिस जसमीत सिंह द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को आसान बनाता है। जस्टिस सिंह ने शुरुआत में यूनिवर्सिटी को इन अंकों के आधार पर एडमिशन को अंतिम रूप देने से रोका था। जस्टिस सिंह ने चिंता व्यक्त की थी कि यह मैकेनिज्म, जो उम्मीदवार के स्कोर में 36 मार्क्स तक जोड़ सकता है (जो 12 पॉइंट्स पर आधारित है जहां प्रत्येक तीन अंकों के बराबर है), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) की पवित्रता से समझौता करता दिखाई देता है।
यूनिवर्सिटी का पक्ष और एडमिशन प्रक्रिया
JNU के वकील ने तर्क दिया कि यह नीति जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी एक्ट, 1966 के अनुसार भौगोलिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए 1974 से लागू है। यूनिवर्सिटी ने बताया कि अंतरिम रोक से पूरी एडमिशन प्रक्रिया रुक गई थी, जिसमें उन उम्मीदवारों को पॉइंट्स मिलना शामिल है जिन्हें Quartile 1 या Quartile 2 जिलों में पिछली स्कूली शिक्षा मिली है। हालांकि एडमिशन जारी हैं, लेकिन वे अमित मेहरा द्वारा दायर रिट याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे। यूनिवर्सिटी की एडमिशन प्रक्रिया मई 2026 में शुरू हुई थी, काउंसलिंग का पहला दौर 25 जून को समाप्त हुआ था और पोस्टग्रेजुएट कक्षाएं 30 जुलाई को शुरू हुई थीं।