दिल्ली में H1N1 के मामले 2300 के पार, अस्पतालों की तैयारी पर सरकार की हाईलेवल मीटिंग

दिल्ली में इस साल H1N1 इन्फ्लूएंजा के मामले तेजी से बढ़कर 2,308 तक पहुंच गए हैं। राजधानी में कुल इन्फ्लूएंजा संक्रमण के मामले करीब 3,000 हो गए हैं। 20 अगस्त 2026 तक शहर में 1,777 H1N1 मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद हाल ही में मामलों में भारी उछाल आया है। इस स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 25 अगस्त 2026 को एक आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई। इस संबंध में अधिक जानकारी यहाँ देखें।
अस्पतालों की तैयारी और मंत्रियों के निर्देश
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और जनता को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शहर के अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, स्टाफ और दवाइयां मौजूद हैं। मंत्री सिंह ने चेतावनी दी कि आइसोलेशन वार्ड में मरीजों को बेड देने से मना करने वाले किसी भी अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने स्पष्ट किया कि मामलों में यह वृद्धि एक सामान्य मौसमी इन्फ्लूएंजा का रुझान है और H1N1 का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है।
अस्पताल के बेड और जांच की स्थिति
सरकारी अस्पतालों ने फीवर क्लिनिक बनाकर, सैंपल की जांच बढ़ाकर और आइसोलेशन बेड आरक्षित करके अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्राइवेट लैब में H1N1 जांच की कीमत 1,500 रुपये से 5,000 रुपये के बीच है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह जांच न के बराबर खर्च पर हो रही है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने की सलाह दी है और शिक्षा विभाग ने स्कूलों को साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
राहत भरी खबर और अन्य बीमारियां
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हालांकि H1N1 वर्तमान में सबसे प्रभावी स्ट्रेन है, लेकिन इससे किसी की मौत की खबर नहीं है और न ही कोई मरीज वेंटिलेटर या आईसीयू में है। इसके अलावा, स्वास्थ्य अधिकारी वेक्टर जनित बीमारियों को लेकर भी पूरी तरह सतर्क हैं, और इस साल शहर में डेंगू के 570 तथा मलेरिया के 215 मामले दर्ज किए गए हैं। इस बारे में पूरी जानकारी यहाँ उपलब्ध है।