दिल्ली में इस साल H1N1 इन्फ्लूएंजा यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में बड़ी तेजी दर्ज की गई है। आधिकारिक डेटा के अनुसार 20 अगस्त 2026 तक दिल्ली में H1N1 के 1,777 मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले साल इसी अवधि के 229 मामलों से लगभग आठ गुना ज्यादा हैं। राजधानी में कुल इन्फ्लूएंजा ए के मामले अब 2,300 से अधिक हो गए हैं, हालांकि अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अभी तक H1N1 से किसी की मौत की सूचना नहीं मिली है। इस संबंध में ANI की रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञ एहतियात बरतने की अपील कर रहे हैं।
सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टर धीरन गुप्ता ने बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या पुरानी फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को निमोनिया जैसी जटिलताओं का अधिक खतरा है। पीएसआरआई अस्पताल की डॉक्टर नीतू जैन ने इस बढ़ोतरी का कारण मौजूदा उच्च ह्यूमिडिटी और तापमान जैसे मौसम को बताया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में छह गुना अधिक है। दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों के भर्ती होने की संख्या बढ़ रही है। टैगोर इंटरनेशनल स्कूल और ऐलोन इंटरनेशनल स्कूल जैसे स्कूलों ने भी माता-पिता को सलाह दी है कि वे लक्षण दिखने पर बच्चों को घर पर ही रखें, जिसकी विस्तृत जानकारी
ANI की इस खबर में दी गई है।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने 35 अस्पतालों को विशेष निगरानी में रखा है और एम्स तथा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) को रेफरल प्रयोगशालाओं के रूप में नामित किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लक्षणों की शुरुआती पहचान पर जोर दिया है और बताया है कि ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवाएं लक्षण शुरू होने के 48 घंटे के भीतर देने पर सबसे अधिक प्रभावी होती हैं। डॉ. सौम्या स्वामीनाथन और ICMR के सूत्रों ने पुष्टि की है कि फैल रहा H1N1 स्ट्रेन नया या अधिक खतरनाक नहीं है, बल्कि यह सामान्य मौसमी फ्लू गतिविधि के समान है। अधिकारियों ने जनता को भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनने, श्वसन स्वच्छता बनाए रखने और गंभीर लक्षणों के लिए चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी है, साथ ही
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक खुद से दवा लेने से बचने को कहा है।