दिल्ली से गुवाहाटी तक दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, रेल मंत्रालय ने कॉरिडोर विस्तार को दी मंजूरी
दिल्ली से गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन अब हकीकत बनेगी। जानिए इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के रूट और समय की पूरी जानकारी।

देश के परिवहन ढांचे में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने प्रस्तावित दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को अब आगे बढ़ाकर गुवाहाटी तक ले जाने का फैसला किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आधिकारिक तौर पर इस विस्तार को मंजूरी दे दी है, जिससे अब उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार को इस खबर की पुष्टि की।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव तब पड़ी जब जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री सरमा ने रेल मंत्री से मुलाकात कर यह अनुरोध किया था। इसके बाद 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी और नई दिल्ली के बीच वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के उद्घाटन के दौरान रेल मंत्री ने इसकी घोषणा की थी। यह पूरा कॉरिडोर लगभग 1,500 किलोमीटर लंबा होगा, जो देश के कई प्रमुख शहरों को आपस में जोड़ेगा।
इन शहरों से होकर गुजरेगी हाई-स्पीड ट्रेन
यह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर केवल दो शहरों को नहीं, बल्कि उत्तर और पूर्व के कई महत्वपूर्ण केंद्रों को जोड़ेगा। इस रूट में दिल्ली के अलावा आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और पटना जैसे शहर शामिल होंगे। सिलीगुड़ी से होते हुए यह ट्रेन अंततः गुवाहाटी पहुंचेगी। सबसे बड़ी राहत यह होगी कि दिल्ली से गुवाहाटी का सफर, जो फिलहाल काफी समय लेता है, वह घटकर आठ घंटे से भी कम रह जाएगा।
इस फैसले पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, "इसीलिए, मोदी कहीं नहीं जाएगा!" उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कॉरिडोर असम में हाई-टेक औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देगा और स्थानीय व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि यह सेवा केवल अमीरों के लिए नहीं होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि टिकट की दरें किफायती रखी जाएंगी, जो हवाई किराए की तुलना में काफी कम होंगी। साथ ही, यह प्रोजेक्ट 'मेक इन इंडिया' अभियान का हिस्सा है। ट्रेन के पिलर और गर्डर समेत सभी स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स भारतीय मजदूरों द्वारा देश में ही तैयार किए जाएंगे। यह परियोजना उन सात हाई-स्पीड कॉरिडोर का हिस्सा है, जिन्हें छात्रों, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।