दिवाली पर दिल्ली के बाजारों में पहुंचे ग्रीन पटाखे, सुप्रीम कोर्ट ने तय की समय सीमा

दिल्ली में दिवाली के लिए ग्रीन पटाखों की बिक्री शुरू। जानें सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समय और नियमों के बारे में।

Kittu Kumari5 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिवाली पर दिल्ली के बाजारों में पहुंचे ग्रीन पटाखे, सुप्रीम कोर्ट ने तय की समय सीमा

दिवाली का त्योहार करीब है और दिल्ली के बाजारों में रौनक लौटने लगी है। इस बार बाजारों में दिल्ली में ग्रीन पटाखे की नई वैरायटी जैसे 'मैजिक फोर्क' और 'बड़ी बम' नजर आ रहे हैं। हालांकि, शहर में पटाखों को लेकर कड़े नियम लागू हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस बार कुछ सीमित राहत दी है, जिससे लोग तय नियमों के दायरे में रहकर जश्न मना सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, दिल्ली-एनसीआर में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। आम जनता 7 और 8 नवंबर 2026 को इन पटाखों को चला सकती है। लेकिन ध्यान रहे कि इसके लिए समय निर्धारित किया गया है। आप सुबह 6:00 बजे से 7:00 बजे तक और रात 8:00 बजे से 10:00 बजे तक ही पटाखे जला सकते हैं। 9 नवंबर से एक बार फिर पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा।

सावधान! इन नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी

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प्रशासन ने साफ किया है कि केवल वही पटाखे कानूनी रूप से मान्य होंगे जिन्हें CSIR-NEERI द्वारा मंजूरी मिली है और जिन पर PESO का सर्टिफिकेट है। हर पटाखे के डिब्बे पर एक नॉन-ट्रांसफरेबल QR कोड होना अनिवार्य है, जिसमें निर्माता और टेस्टिंग की पूरी जानकारी होगी।

  • प्रतिबंधित क्षेत्र: अस्पताल, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्र, ओल्ड एज होम और शिक्षण संस्थानों जैसे 'साइलेंस जोन' के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाना सख्त मना है।
  • क्या नहीं चलेगा: बेरियम साल्ट वाले पटाखे और पटाखों की लड़ियों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। पारंपरिक पटाखे बेचना या चलाना गैरकानूनी होगा।
  • बिक्री के नियम: पटाखों की बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों को 4 से 6 नवंबर तक की अनुमति दी गई है। ऑनलाइन बिक्री पर पूरी तरह रोक है।

स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन लगातार बाजारों की जांच कर रहे हैं ताकि QR कोड और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। व्यापारियों को आर्थिक सुरक्षा राशि जमा करनी पड़ी है और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में उनका लाइसेंस तुरंत रद्द कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण इस पूरी प्रक्रिया का डेटा जुटाएंगे और दिसंबर 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।

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