दिल्ली: 63 मिनट में 95 किमी का सफर, ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा दिल और बची जान

Kittu Kumari9 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली: 63 मिनट में 95 किमी का सफर, ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा दिल और बची जान

दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल में एक बेहद जटिल और समय के साथ दौड़ने वाली सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। एक 47 वर्षीय मरीज, चंचल यादव, जो गंभीर हार्ट फेल्योर से जूझ रहे थे, उन्हें एक नया जीवन मिला है। यह मुमकिन हो पाया हरियाणा के रोहतक स्थित PGIMS से दिल्ली तक बनाए गए एक 'ग्रीन कॉरिडोर' की बदौलत, जिसने 95 किलोमीटर की दूरी को महज 63 मिनट में तय कर लिया।

इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत सुबह 8:50 बजे हुई, जब नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) नेटवर्क के जरिए दिल की उपलब्धता की सूचना मिली। कागजी कार्रवाई और मरीज के चयन के बाद दोपहर 12:03 बजे आवंटन फाइनल हुआ। इसके बाद मेडिकल टीम दोपहर 2:49 बजे दिल्ली से रवाना हुई और शाम 4:34 बजे रोहतक पहुंची। शाम 7:20 बजे अंग को निकालने की प्रक्रिया पूरी हुई और ठीक 7:40 बजे एम्बुलेंस रोहतक से दिल्ली के लिए निकली, जो रात 8:43 बजे अस्पताल पहुंच गई।

पुलिस और मेडिकल टीम का बेमिसाल तालमेल

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इस अंतरराज्यीय मिशन की सफलता के पीछे हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस का जबरदस्त समन्वय था। ट्रैफिक डीसीपी (नदर्न रेंज) सचिन कुमार सिंघल और एसीपी राजेश कुमार की देखरेख में ट्रैफिक पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि एम्बुलेंस को रास्ते में एक पल के लिए भी रुकना न पड़े।

फोर्टिस अस्पताल के वाइस प्रेसिडेंट नवीन शर्मा ने बताया कि इस तरह के कॉरिडोर को बनाना मेडिकल टीम और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच असाधारण तालमेल का परिणाम होता है। वहीं, सीनियर डायरेक्टर डॉ. दिनेश कुमार मित्तल ने जोर देकर कहा कि हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी सर्जरी में हर एक मिनट की कीमत होती है और समय पर पहुंचना ही मरीज की जान बचाने की कुंजी है। कार्डियोलॉजी के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. नरेश कुमार गोयल के अनुसार, यह ट्रांसप्लांट मरीज के लिए इलाज का एकमात्र और निर्णायक विकल्प था।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस मिशन की सफलता का श्रेय प्रोफेशनल ट्रैफिक मैनेजमेंट और दोनों राज्यों की पुलिस के बीच बेहतरीन टीम वर्क को दिया है।

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