दिल्ली सरकार ने सर्दियों के प्रदूषण को रोकने के लिए नया नियम लागू किया

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए एक स्थायी शीतकालीन कार्य योजना तैयार की है। यह नई नीति हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगी। इस नीति की पुष्टि 28 सितंबर 2026 को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने की थी और इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा तथा लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा शामिल हुए थे। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत बनाए गए इन नए नियमों के अनुसार पेट्रोल पंपों पर साल भर नो पीयूसी नो फ्यूल नीति लागू होगी और 1 अक्टूबर से इस पर सख्ती बढ़ाई जाएगी।
सख्त पाबंदियां और समय में बदलाव
1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच धूल उड़ाने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच यह प्रतिबंध और भी ज्यादा सख्त होगा। इस दौरान रेत, ईंट, सीमेंट, पत्थर और मलबा ले जाने वाले वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक रहेगी। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति होगी और बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे। दफ्तरों के समय में भी बदलाव किया गया है, जिसके तहत 1 नवंबर से 28 फरवरी तक एमसीडी के दफ्तर सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक और जीएनसीटीडी के दफ्तर सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे।
वाहन नियम और पार्किंग फीस
वाहनों से जुड़े नियमों के तहत 1 नवंबर से 31 जनवरी तक बीएस-6 मानकों को पूरा न करने वाले अन्य राज्यों के वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी, हालांकि इसमें इलेक्ट्रिक, सीएनजी, आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं के वाहन शामिल नहीं हैं। अधिकारियों ने तीन स्वचालित परीक्षण स्टेशनों पर लगभग 250,000 वाहनों की फिटनेस जांच तय की है। निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से 28 फरवरी तक सभी अधिकृत जगहों पर पार्किंग फीस दोगुनी कर दी जाएगी, हालांकि इसमें दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) की सुविधाएं शामिल नहीं हैं। सरकार अक्टूबर में एक जन जागरूकता अभियान शुरू करेगी, नवंबर में पीयूसी केंद्रों को अपग्रेड करेगी और 10 अक्टूबर तक 37 चिन्हित हॉटस्पॉट पर जन भागीदारी कार्यक्रम लागू करेगी।