यमुना की सफाई के लिए दिल्ली सरकार की बड़ी पहल, स्वीडन की कंपनी से मांगेगी मदद
यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने स्वीडन की एक कंपनी से सीवेज स्लज मैनेजमेंट तकनीक पर चर्चा की है।

राजधानी की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने और उसे पुनर्जीवित करने के लिए दिल्ली सरकार अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीक की तलाश कर रही है। इसी कड़ी में यमुना सीवेज स्लज मैनेजमेंट के लिए स्वीडन की एक विशेषज्ञ कंपनी के प्रतिनिधियों ने दिल्ली सचिवालय में जल मंत्री और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अध्यक्ष परवेश साहिब सिंह से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सीवेज और कीचड़ (स्लज) के निपटान के लिए आधुनिक तकनीकों पर चर्चा करना था।
बैठक के दौरान मंत्री परवेश साहिब सिंह ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार ऐसे संगठनों के साथ काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान दे सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन का लक्ष्य शहर की जल और अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना है, ताकि यमुना में गिरने वाले प्रदूषण के भार को कम किया जा सके। हालांकि, यह अभी शुरुआती चर्चा का दौर है और फिलहाल किसी भी तरह का कॉन्ट्रैक्ट या फंडिंग तय नहीं की गई है।
अंतरराष्ट्रीय तकनीक से बदलेगी यमुना की सूरत
दिल्ली सरकार अपनी घरेलू प्रदूषण नियंत्रण कोशिशों में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता को शामिल कर रही है। यमुना को साफ करने के लिए यह पहली बार नहीं है जब विदेशी तकनीक का सहारा लिया गया हो। वर्तमान में फिनलैंड की कंपनी 'एक्वामेक' (Aquamec) की 'वॉटरमास्टर' एम्फीबियस ड्रेजिंग तकनीक का इस्तेमाल नजफगढ़ ड्रेन में किया जा रहा है। इस मशीन के जरिए गाद, कीचड़ और जलीय खरपतवारों को निकाला जा रहा है ताकि बुनियादी ढांचे में सुधार हो सके।
अब स्वीडन की कंपनी के साथ हो रही यह चर्चा इसी दिशा में एक और कदम है, जिससे उम्मीद है कि सीवेज स्लज के बेहतर प्रबंधन से नदी की स्वच्छता में बड़ा सुधार आएगा।