नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने गणेश उत्सव के दौरान शहर में खंडित मूर्तियों और पूजा सामग्री के सम्मानजनक निपटान के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन की विशेष व्यवस्था की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल के तहत शहर में 110 संग्रहण केंद्र बनाए जा रहे हैं। इन चिन्हित स्थानों पर लोग सार्वजनिक स्थानों पर छोड़ने के बजाय पुरानी या खंडित मूर्तियां और पूजा सामग्री जमा कर सकते हैं। इन विसर्जन पात्रों को शहर के 18 प्रमुख क्षेत्रीय क्लस्टर में चालू किया जा रहा है। श्रद्धालु और परिवार वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग के लिए धार्मिक वस्तुएं दान कर सकते हैं।
केंद्रों पर स्वीकार्य वस्तुओं में पुरानी या खंडित तसवीरें, मूर्तियां, धार्मिक कैलेंडर, पूजा चौकी, लकड़ी और प्लास्टर की सजावट, टूटे दीये, मिट्टी के दीये, पूजा सामग्री, सूखे फूल, हार के अवशेष, रुई की बत्तियां, कागज की सजावट, प्राकृतिक पत्तियां और अगरबत्ती शामिल हैं।
पूरी राजधानी को कवर करने के लिए संग्रह नेटवर्क को 18 भौगोलिक बेल्ट में बांटा गया है। इनमें नरेला-अलीपुर, मुकुंदपुर-सिविल लाइंस, रोहिणी, पंजाबी बाग-राजौरी गार्डन, द्वारका, वसंत कुंज-महरौली, ग्रेटर कैलाश-लाजपत नगर, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर और यमुना किनारे के क्लस्टर शामिल हैं।
अपशिष्ट संग्रहण केंद्रों के अलावा सरकार ने गणेश विसर्जन के लिए दिल्ली के सभी 13 जिलों में 81 कृत्रिम विसर्जन तालाब तैयार किए हैं।
सभी 13 जिलों में विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, चिकित्सा सहायता, आपातकालीन प्रतिक्रिया और यातायात प्रबंधन के इंतजाम किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल निर्धारित विसर्जन स्थलों का ही उपयोग करें और यमुना या अन्य जल निकायों में मूर्तियां विसर्जित करने से बचें। उन्होंने लोगों से पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियों का विकल्प चुनने और प्लास्टर ऑफ पेरिस, हानिकारक रासायनिक रंगों तथा जल निकायों को दूषित करने वाली सामग्रियों से बचने का आग्रह किया है। सरकार ने कहा है कि उत्सव के बाद विसर्जन स्थलों से मूर्ति के अवशेष और अन्य सामग्री हटा दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य लोगों को सार्वजनिक स्थानों और दिल्ली के जल निकायों को साफ रखते हुए अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अनुमति देना है। गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है और देश भर में प्रार्थना, मूर्ति स्थापना और समारोहों के साथ मनाई जाती है। यह त्योहार गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होता है, जब भक्त मूर्ति को पानी में विसर्जित करते हैं।