दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सैनिटरी नैपकिन की सप्लाई बंद, वकील ने जताई चिंता
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में किशोरी योजना के तहत सैनिटरी नैपकिन की सप्लाई पिछले दो महीने से बंद है, वकील ने सरकार को लिखा पत्र।

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता का संकट खड़ा हो गया है। आरोप है कि पिछले दो महीनों से इन स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी नैपकिन का वितरण पूरी तरह बंद है। इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अशोक अग्रवाल ने दिल्ली सरकार के शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर इस लापरवाही पर कड़ा विरोध जताया है।
अशोक अग्रवाल के अनुसार, सितंबर 2026 से छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने इसे एक गंभीर चूक बताया है, जिसका सीधा असर छात्राओं के स्वास्थ्य, गरिमा और उनकी शिक्षा पर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का तुरंत समाधान किया जाए और सप्लाई को बहाल किया जाए।
किशोरी योजना और अदालती आदेशों की अनदेखी
बता दें कि शिक्षा निदेशालय द्वारा कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए 'किशोरी योजना' चलाई जाती है, जिसके तहत मुफ्त सैनिटरी नैपकिन दिए जाने का प्रावधान है। यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि अदालती आदेशों की अवहेलना भी है। 6 जुलाई 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिया था कि सैनिटरी नैपकिन की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।
सरकार ने पहले कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि स्कूल प्रमुखों को फंड दिए गए हैं ताकि वे गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के जरिए नैपकिन खरीद सकें और कमी न होने दें। इसके अलावा, 30 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया था कि मासिक धर्म स्वास्थ्य (Menstrual Health) संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' का हिस्सा है। कोर्ट ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को कक्षा 6 से 12 तक की लड़कियों के लिए मुफ्त बायोडिग्रेडेबल नैपकिन और अलग शौचालयों की सुविधा सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।
इस पूरे मामले पर शिक्षा निदेशालय ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महदेवन की बेंच ने राज्यों को अनुपालन के लिए आखिरी मौका दिया है और इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर 2026 को होनी तय है।