दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नहीं मिल रही इडली-सांबर, डेडलाइन खत्म पर तैयारी अधूरी

दिल्ली के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों को मिड-डे मील में इडली-सांबर खिलाने की योजना फिलहाल कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा तय की गई 24 अगस्त की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी स्कूलों में यह डिश शामिल नहीं की जा सकी है। हैरानी की बात यह है कि अक्टूबर के मध्य तक पहुँचने के बाद भी छात्र पुराने मेन्यू वाले भोजन पर ही निर्भर हैं।
दरअसल, शिक्षा निदेशालय ने 11 अगस्त को PM-POSHAN मेन्यू में बदलाव किया था। इडली-सांबर जैसे व्यंजनों के लिए विशेष बुनियादी ढांचे, उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है, इसलिए इसे लागू करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया था। निदेशालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पैनल में शामिल एनजीओ और सेंट्रलाइज्ड किचन प्रदाताओं को 24 अगस्त तक सारी व्यवस्थाएं पूरी कर लेनी चाहिए थीं।
रसोई में संसाधनों की भारी कमी
इस देरी की असली वजह स्कूलों की रसोई में सुविधाओं का अभाव है। गवर्नमेंट स्कूल प्रिंसिपल्स एसोसिएशन के एक सदस्य ने बताया कि स्कूलों के पास इडली बनाने के लिए जरूरी उपकरण मौजूद नहीं हैं, जिसके कारण इस नई डिश को नियमित रूप से बनाना नामुमकिन हो गया है। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के एक सदस्य ने भी इस बात की पुष्टि की है कि लॉजिस्टिक बाधाओं और संसाधनों की कमी की वजह से स्कूलों में अब भी पुराना मेन्यू ही चल रहा है।
नियमों के मुताबिक, लागू करने वाली एजेंसियों को शुरुआत के तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी थी और जोनल व डिस्ट्रिक्ट शिक्षा अधिकारियों को फील्ड वेरिफिकेशन करना था। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि संस्थागत तैयारियों की कमी ने इस पूरी प्रक्रिया को रोक दिया है।
बता दें कि मेन्यू में केवल इडली-सांबर ही नहीं, बल्कि अन्य बदलाव भी किए गए थे। इसमें रागी हलवे की जगह गेहूं के आटे और चना मसाला को शामिल करना था, साथ ही ज्वार और बाजरा आधारित व्यंजनों को भी मेन्यू का हिस्सा बनाना था। लेकिन संसाधनों की कमी ने छात्रों को इस नए और पौष्टिक बदलाव से दूर रखा हुआ है।