दिल्ली में अब रेगुलेट होंगे PG आवास, सरकार ने गठित की विशेष सब-कमेटी

दिल्ली के प्रमुख शिक्षण संस्थानों और ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के आसपास चलने वाले पेइंग गेस्ट (PG) आवासों की अब सरकार सख्ती से निगरानी करेगी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में हुई एक हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) की बैठक के बाद एक सब-कमेटी का गठन किया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य छात्रों के लिए सुरक्षित और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त आवास सुनिश्चित करना है।
यह पूरी कवायद सितंबर 2026 में सत्य निकेतन में हुए उस दर्दनाक हादसे के बाद शुरू हुई है, जहां एक इमारत गिरने से सात लोगों की जान चली गई थी। इस त्रासदी ने पीजी आवासों की सुरक्षा और उनके स्ट्रक्चरल ऑडिट की जरूरत को उजागर कर दिया। अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि छात्रों को न केवल किफायती, बल्कि सुरक्षित माहौल भी मिले।
सुरक्षा के कड़े नियम और 'GovPG' पोर्टल की तैयारी
नई व्यवस्था के तहत, अब पीजी संचालकों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य हो सकता है। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कॉमन एरिया और एंट्री पॉइंट्स पर CCTV कैमरे लगाना जरूरी होगा, जिनका बैकअप कम से कम 40-45 दिनों का रखना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर फुटेज जांची जा सके। साथ ही, रात के समय गार्ड्स की तैनाती और किराए के रेगुलेशन पर भी विचार किया जा रहा है।
तकनीकी स्तर पर सरकार 'GovPG' नाम का एक वेब पोर्टल लॉन्च करने जा रही है। इस पोर्टल के जरिए छात्रों के निवास की मैपिंग की जाएगी और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी और एमसीडी के साथ मिलकर अगले कुछ दिनों में इसका ट्रायल शुरू होने की उम्मीद है।
इस सब-कमेटी में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), नगर निगम (MCD), दिल्ली सरकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति शामिल हैं। यह टीम मास्टर प्लान और दिल्ली नगर निगम अधिनियम की समीक्षा करेगी ताकि शिक्षण केंद्रों के 5-6 किलोमीटर के दायरे में पीजी संचालन को कानूनी रूप दिया जा सके।
उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने भी दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास के आवासों की मैपिंग करने और कैंपस के आसपास लाइटिंग व निगरानी जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे को सुधारने के निर्देश दिए हैं। दशहरा की छुट्टियों के बाद कमेटी दोबारा बैठक करेगी, जिसमें सब-कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम रेगुलेटरी ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।