दिल्ली सरकार का बड़ा कदम, यमुना प्रदूषण रोकने के लिए सभी धोबी घाट बंद करने और हटाने का आदेश

दिल्ली सरकार ने यमुना नदी में प्रदूषण को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने नदी के किनारे बने सभी धोबी घाटों को बंद करने और उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट करने का आदेश दिया है। 27 अगस्त 2026 को आधिकारिक सूत्रों ने यह पुष्टि की है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिना ट्रीट किया हुआ और डिटर्जेंट वाला गंदा पानी सीधे नदी में जाने से रोकना है। यह गंदा पानी नदी को गंदा करने का एक बड़ा कारण माना गया है। दिल्ली सरकार का यह आदेश यमुना की सफाई को लेकर उठाया गया है।
नगर निगम यानी एमसीडी और दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए को इन धोबी घाटों को तुरंत हटाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इन एजेंसियों के साथ-साथ दिल्ली सरकार के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग तथा उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को भी तुरंत कार्रवाई करने का जिम्मा सौंपा गया है। इन सभी विभागों को मिलकर राष्ट्रीय राजधानी से गुजरने वाले 22 किलोमीटर लंबे यमुना नदी के हिस्से पर पड़ने वाले बुरे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है। अधिकारियों को इस काम में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के निर्देश मिले हैं।
यह प्रशासनिक फैसला दिल्ली हाईकोर्ट की एक खंडपीठ द्वारा 24 अगस्त 2026 को दिए गए सख्त आदेश के बाद आया है। इस बेंच में जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा शामिल थीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने यमुना में लगातार गिर रहे गंदे और अनट्रीटेड सीवेज पर गहरी चिंता जताई थी। कोर्ट ने सीवेज ट्रीटमेंट, ड्रेनेज सिस्टम और औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास पर तेजी से काम करने का आदेश दिया था। अदालत ने इस बात पर जोर दिया था कि किसी भी स्थिति में गंदा पानी नदी में नहीं जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि नदी में किसी भी तरह का दूषित कचरा नहीं गिरना चाहिए।
इसके बाद 26 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने दिल्ली की सीवेज व्यवस्था की फिर से समीक्षा की। कोर्ट ने यह नोट किया कि यमुना नदी को और अधिक गंदा होने से बचाने के लिए बड़ी ढांचागत कमियों को तुरंत ठीक करना जरूरी है। सरकार का यह नया आदेश जिसमें कपड़े धोने के कामों को हटाया जा रहा है, यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए चलाए जा रहे बड़े और तेज अभियानों का ही एक हिस्सा है। सरकार यमुना नदी को साफ करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।