दिल्ली सरकार ने सिनेमा हॉल लाइसेंसिंग के लिए लॉन्च किया सिंगल-विंडो पोर्टल, खत्म हुआ पुराना सिस्टम

दिल्ली सरकार ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को एक नई Standard Operating Procedure (SOP) की आधिकारिक तौर पर घोषणा की है। इसके तहत सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स के लाइसेंस के लिए एक एकीकृत, सिंगल-विंडो और समयबद्ध ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई है। यह नई पॉलिसी पुराने multi-NOC सिस्टम की जगह लेती है, जिसका उद्देश्य दिल्ली पुलिस, फायर डिपार्टमेंट, Municipal Corporation of Delhi (MCD), दिल्ली जल बोर्ड, हेल्थ डिपार्टमेंट और पावर यूटिलिटीज जैसी विभिन्न एजेंसियों से अलग-अलग क्लीयरेंस लेने की आवश्यकता को खत्म करना है।
पोर्टल और नई लाइसेंसिंग समिति
अब पूरी प्रक्रिया e-District Delhi पोर्टल के माध्यम से मैनेज की जाती है। लाइसेंस जारी करने का अधिकार, जो पहले दिल्ली पुलिस के पास था, अब District Licensing Committee (DLC) को ट्रांसफर कर दिया गया है, जिसकी अध्यक्षता District Magistrate करते हैं। DLC में पुलिस, दिल्ली फायर सर्विसेज, MCD, दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी और दिल्ली जल बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हैं। Sub-Divisional Magistrate की अगुवाई वाली एक अलग District Inspection Committee (DIC) को संयुक्त निरीक्षण करने और पोर्टल पर जियो-टैग किए गए, ई-हस्ताक्षर वाले वेरिफिकेशन रिपोर्ट अपलोड करने का काम सौंपा गया है।
समय सीमा और सुरक्षा नियम
SOP में सख्त समय सीमा तय की गई है: शुरुआती आवेदन की जांच 7 working days के भीतर पूरी होनी चाहिए, जिसके बाद DIC निरीक्षण के लिए 45-day window और अंतिम निर्णय लेने के लिए DLC के पास 30-day period होगा। यदि कोई आवेदन नियमों के अनुकूल है लेकिन इन समय सीमाओं से अधिक समय लेता है, तो सुरक्षा आवश्यकताओं के पूरा होने पर सिस्टम ऑटोमैटिक अप्रूवल की अनुमति देता है। इस पॉलिसी में वार्षिक संयुक्त निरीक्षण, औचक निरीक्षण और दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी से जुड़े साल में दो मॉक ड्रिल अनिवार्य किए गए हैं।
मुख्यमंत्री का बयान और अन्य विवरण
Chief Minister Rekha Gupta ने कहा कि यह सिस्टम public safety को प्राथमिकता देते हुए एक "स्पष्ट, जवाबदेह और तकनीक-संचालित तंत्र" प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि हालांकि SOP को 2015 में अंतिम रूप दे दिया गया था, लेकिन कथित निष्क्रियता के कारण पिछली आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा इसे लागू नहीं किया गया था। यह कदम Uphaar Cinema त्रासदी के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है। नए ढांचे में एक पोर्टल-आधारित शिकायत निवारण तंत्र शामिल है, जिसमें गंभीर शिकायतों को Divisional Commissioner के पास भेजा जाता है। शहर में सिनेमा प्रदर्शन की प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किए जाने से ऑपरेटरों और मॉल डेवलपर्स को कम होती नौकरशाही का लाभ मिलने की उम्मीद है।