दिल्ली सरकार ने महिलाओं और ट्रांसजेंडरों को सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार देने के लिए 'दुर्गा' (Upliftment and Rozgar for Women/Transgender Green E-Auto) योजना को मंजूरी दे दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को हरी झंडी दिखाई गई। इस योजना के पहले चरण में 1,300 पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो सड़क पर उतारे जाएंगे। इसमें से 1,170 वाहन महिलाओं के लिए और 130 वाहन ट्रांसजेंडरों के लिए आरक्षित किए गए हैं। हर राजस्व जिले में महिलाओं के लिए 90 और ट्रांसजेंडरों के लिए 10 इलेक्ट्रिक ऑटो तय किए गए हैं। इसके लिए आवेदक एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल के जरिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
महिलाओं के लिए जरूरी है कि उनकी उम्र 20 से 40 साल के बीच हो, वे दिल्ली की निवासी हों, और उनके पास वैध वोटर आईडी, लाइट मोटर वाहन (LMV) ड्राइविंग लाइसेंस तथा पब्लिक सर्विस व्हीकल (PSV) बैज हो। जिन महिलाओं के तीन से ज्यादा बच्चे हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगी। इसके अलावा, आवेदक या उनके परिवार के पास कोई रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्ट वाहन या तिपहिया वाहन नहीं होना चाहिए और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए परिवार की कुल आय पांच लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। ट्रांसजेंडरों के लिए जरूरी है कि उनके पास दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय द्वारा जारी वैध ट्रांसजेंडर प्रमाण पत्र हो, उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच हो, दिल्ली का निवास हो, वोटर आईडी, LMV लाइसेंस और PSV बैज हो।
इन इलेक्ट्रिक ऑटो पर
तीन साल की अनिवार्य लॉक-इन अवधि लागू होगी, जिसके दौरान इन्हें बेचा, ट्रांसफर या ठिकाने नहीं लगाया जा सकता है। इस योजना में मदद के लिए डीएमआरसी (DMRC) ने पहले ही
70 मेट्रो स्टेशनों पर ईवी चार्जिंग के लिए जगह आवंटित कर दी है। अधिकारियों का अनुमान है कि 1,300 ई-ऑटो के चलने से रिपेयर वर्कशॉप, सर्विसिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि यात्रियों का भरोसा बढ़ाने और आसानी से पहचान के लिए पिंक ऑटो पर 'दुर्गा' की ब्रांडिंग होगी। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं और ट्रांसजेंडरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और राजधानी में प्रदूषण को कम करना है।