दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: बाढ़ रोकने के लिए 622 करोड़ का प्लान पास, यमुना पर बनेगी दीवार
दिल्ली सरकार ने बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए 622 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है, जिसमें यमुना तटबंध दीवार भी शामिल है।

राजधानी दिल्ली को हर साल होने वाले जलभराव और यमुना की बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 622 करोड़ रुपये की एक व्यापक बाढ़ प्रबंधन और ड्रेनेज योजना को मंजूरी दे दी है। इस पूरी योजना का मकसद शहर के निचले इलाकों को डूबने से बचाना और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना है। शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा की अध्यक्षता में हुई फ्लड कंट्रोल बोर्ड की 40वीं बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।
यमुना किनारे बनेगी 4.7 किमी लंबी सुरक्षा दीवार
इस पूरी योजना का सबसे अहम हिस्सा 99 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली एक सुरक्षा दीवार है। यमुना नदी के किनारे मैगजीन रोड ड्रेन और पुराने रेलवे पुल के बीच लगभग 4.7 किलोमीटर लंबी आरसीसी (RCC) दीवार बनाई जाएगी। यह दीवार करीब 6 से 7 फीट ऊंची होगी, जो सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे इलाकों को बाढ़ के पानी से बचाएगी। गौरतलब है कि 2023 और 2025 की भीषण बाढ़ के दौरान ये इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे।
बाढ़ नियंत्रण की इस बड़ी रणनीति में केवल दीवार ही नहीं, बल्कि कचरे और गाद के निपटान पर भी जोर दिया गया है। योजना के तहत 260 करोड़ रुपये तीन बायोमाइनिंग प्रोजेक्ट्स के लिए रखे गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य नजफगढ़ ड्रेन जैसे बड़े नालों से निकाली गई गाद का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना है, ताकि वह दोबारा ड्रेनेज सिस्टम में न घुल जाए।
इसके अलावा, दिल्ली सरकार अब शहर के नालों का कायाकल्प भी करने जा रही है। बारापुला ड्रेन के पुनर्विकास की तर्ज पर अन्य नालों के किनारे वॉकिंग ट्रैक, ग्रीन बेल्ट, सुरक्षा फेंसिंग और बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इन सभी प्रोजेक्ट्स को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि भविष्य में दिल्लीवासियों को बाढ़ की समस्या से स्थायी राहत मिल सके।