दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में लक्ष्मी योजना के लिए सांसद और विधायक की सिफारिश का किया बचाव

दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर करके 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' के तहत मिलने वाले लाभ के लिए क्षेत्र के सांसद या विधायक की सिफारिश की अनिवार्यता का बचाव किया है। सरकार ने अदालत को बताया कि इस योजना के तहत अब तक ऐसे 7,32,814 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं जिन पर स्थानीय सांसदों और विधायकों की सिफारिशें दर्ज हैं। सरकार ने कहा कि यह याचिका प्रेरित थी और इसमें जनहित का कोई तत्व शामिल नहीं था।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए याचिकाकर्ता के अधिकार पर सवाल उठाया है। सरकार ने उन आरोपों से इनकार किया जिनमें कहा गया था कि आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिए पर मौजूद महिलाओं को सिफारिश पाने के लिए सांसदों और विधायकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं जिससे उन्हें परेशानी और अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। सरकार के अनुसार अब तक मिले 7,32,814 फॉर्म इस बात को साबित करते हैं कि इस शर्त से लाभार्थियों को कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि नीतिगत फैसले की समीक्षा अदालत द्वारा सीमित आधार पर की जा सकती है, जैसे कि वह असंवैधानिक हो या नियमों के खिलाफ हो। सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहा है कि सांसद या विधायक की सिफारिश की शर्त में कोई कानूनी कमी है। यह याचिका जनहित याचिका के रूप में योग्य नहीं है क्योंकि पीड़ित महिलाएं खुद अदालत में आ सकती थीं।
दिल्ली कैबिनेट ने 8 मार्च 2025 को 'महिला समृद्धि योजना' को मंजूरी दी थी जिसे 24 अप्रैल 2025 को दिल्ली के राजपत्र में अधिसूचित किया गया था। इसका उद्देश्य पात्र गरीब महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक मदद देना है। बाद में इस योजना का नाम बदलकर 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' कर दिया गया। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की सिफारिश की शर्त को मनमाना या असंवैधानिक नहीं माना जा सकता है और उसने हाईकोर्ट से याचिका खारिज करने का आग्रह किया है।