दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए IIT दिल्ली के साथ की साझेदारी, खरीदे जाएंगे EV रोड स्वीपर्स

दिल्ली सरकार ने मंगलवार 29 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में वैज्ञानिक तरीके से वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एक्शन प्लान 2026-27 की घोषणा की है। कैबिनेट बैठक में लिए गए इन फैसलों का उद्देश्य राजधानी में प्रदूषण के कारणों का सटीक पता लगाना और सड़कों की सफाई को बेहतर बनाना है। इस योजना के तहत सरकार ने प्रदूषण की निगरानी के लिए कड़े कदम उठाए हैं जो शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
दिल्ली सरकार ने IIT-दिल्ली के साथ पांच साल की साझेदारी को मंजूरी दी है जिसके तहत 19.22 करोड़ रुपये की लागत से PM2.5 और PM10 के स्रोतों की वास्तविक समय में निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा। यह प्रणाली वाहन से होने वाले उत्सर्जन, सड़क की धूल और बायोमास जलाने की घटनाओं का 24 घंटे विश्लेषण करेगी। इसके लिए राउज एवेन्यू सुपर साइट और मोबाइल प्रयोगशालाओं का उपयोग किया जाएगा ताकि हॉटस्पॉट का सटीक अध्ययन किया जा सके।
इसके अलावा कैबिनेट ने 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की खरीद को भी अधिकृत किया है जिन्हें नगर निगम द्वारा तैनात किया जाएगा। ये मशीनें 250 वार्डों के तहत 10 मीटर से कम चौड़ाई वाली लगभग 609 किलोमीटर लंबी सड़कों की सफाई करेंगी। इस पूरी परियोजना की लागत 10 साल की अवधि के लिए 393.73 करोड़ रुपये आंकी गई है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार प्रदूषण को मौसमी समस्या के बजाय साल भर की वैज्ञानिक चुनौती के रूप में ले रही है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क को 47 से बढ़ाकर 60 स्टेशनों तक किया जा रहा है। प्रदूषण के 48 हॉटस्पॉट पर 334 टीमों को तैनात किया गया है और नागरिकों से ग्रीन दिल्ली ऐप के जरिए नियमों के उल्लंघन की रिपोर्ट करने की अपील की गई है।