Delhi Governance Crisis: प्रशासनिक तालमेल की कमी और योजनाओं में देरी से बढ़ी मुश्किलें

दिल्ली के जटिल प्रशासनिक ढांचे और बंटी हुई जवाबदेही के कारण प्रोजेक्ट्स में देरी और सरकारी बजट के गलत इस्तेमाल की लगातार आलोचना हो रही है। शहर की इस governance व्यवस्था में दिल्ली सरकार, Lieutenant Governor (L-G) और केंद्रीय Ministry of Home Affairs के बीच शक्तियों का संतुलन है, जिसकी वजह से जरूरी infrastructure और सेवाओं में तालमेल की दिक्कतें आती हैं। Comptroller and Auditor General के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली सरकार के capital expenditure में बड़ी गिरावट आई है, जो 2021-22 में 8,311 करोड़ रुपये से घटकर 2024-25 में 3,695 करोड़ रुपये रह गया है, जिसका असर मुख्य developmental प्रोजेक्ट्स पर पड़ा है।
डिजिटल बदलाव और प्रशासनिक कदम
इन systemic कमियों को दूर करने के लिए, Chief Minister Rekha Gupta decision-making को आसान बनाने और विभागों की accountability बढ़ाने के लिए e-Cabinet सिस्टम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा, तालमेल बेहतर करने के लिए हाल ही में प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं, जैसे जुलाई 2026 का Delhi Municipal Corporation (DMC) Act में संशोधन, जो बेहतर coordination के लिए municipal zone के नामों को revenue districts के साथ जोड़ता है (Source)।
कानूनी और प्रशासनिक टकराव
इन तमाम कोशिशों के बावजूद legal और administrative friction लगातार बनी हुई है। इस बात की पुष्टि Supreme Court के उस हालिया फैसले से होती है, जिसमें L-G की उस authority को सही ठहराया गया है जिसके तहत वे Council of Ministers की सलाह के बिना Municipal Corporation of Delhi में aldermen को nominate कर सकते हैं।