दिल्ली में गणेश चतुर्थी 2026 की शुरुआत, राजधानी में भव्य तैयारियां और पंडाल सजे

दिल्ली में आज 14 सितंबर 2026 से गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरू हो गया है। राजधानी के घरों और पंडालों में व्यापक तैयारियां की गई हैं। यह त्योहार भगवान गणेश की स्थापना का प्रतीक है और 25 सितंबर 2026 तक चलेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा के अनुसार, आज मूर्ति स्थापना और पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच है। गणेश स्थापना का विशेष मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे के बीच है। चतुर्थी तिथि आज सुबह 7:06 बजे शुरू हुई और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। डेढ़ दिन तक उत्सव मनाने वाले परिवारों के लिए विसर्जन मुहूर्त 15 सितंबर को रात 12:26 बजे से सुबह 1:58 बजे तक और दोपहर 3:31 बजे से शाम 5:03 बजे तक तय किया गया है।
सार्वजनिक उत्सव और मुख्य पंडाल
राजधानी में कई बड़े सार्वजनिक उत्सव चल रहे हैं। पीतमपुरा के डीडीए ग्राउंड में लाल बाग का राजा ट्रस्ट का 10वां गणपती पूजा महोत्सव 14 से 24 सितंबर तक आयोजित हो रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज शाम 6:00 बजे वहां गणेश प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान आयोजकों का लक्ष्य 2,100 भक्तों द्वारा एक साथ शंखनाद करके रिकॉर्ड बनाना है। इस पंडाल में ड्रोन और ब्रह्मोस मिसाइलों जैसी भारत की तकनीकी प्रगति की प्रदर्शनियां भी देखने को मिलेंगी।
लक्ष्मी नगर और अन्य प्रमुख स्थान
लक्ष्मी नगर में श्री गणेश सेवा मंडल बैंक एन्क्लेव के डीडीए मिनी क्रिकेट स्टेडियम में 14 से 25 सितंबर तक 12 दिवसीय महोत्सव के साथ अपनी 25वीं रजत जयंती मना रहा है। इस कार्यक्रम की थीम 'विघ्नहर्ता से विकास-कर्ता: 25 साल की आस्था, विकसित आधुनिक भारत 2047 का संकल्प' है। इसमें 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रदर्शनी भी शामिल होगी। इसके अलावा कनॉट प्लेस स्थित गणेश मंदिर और महाराष्ट्र सदन भी उत्सव के प्रमुख केंद्र हैं, जहां सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति के मार्गदर्शन में पारंपरिक पुणे और मुंबई के रिवाजों का पालन किया जाता है।
धार्मिक नियम और सावधानियां
धार्मिक विशेषज्ञों ने अनुष्ठानों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया है। इसमें वेदियों पर लाल या पीले रंग के कपड़ों का उपयोग करना और मिट्टी की मूर्तियों को नुकसान से बचाने के लिए विशेष ध्यान रखना शामिल है। धर्मसिंधु के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि गलती से चंद्रमा दिख जाए, तो मंत्र जाप करने की सिफारिश की गई है।