दिल्ली के खान-पान की दुनिया: बिरयानी-कबाब का जलवा और एमसीडी की बड़ी कार्रवाई

दिल्ली अपने खान-पान के लिए दुनिया भर में मशहूर है, जहाँ की खुशबूदार बिरयानी, मसालेदार ग्रेवी और गरमा-गरम तंदूरी कबाब खाने के शौकीनों को अपनी ओर खींचते हैं। राजधानी में बड़े रेस्टोरेंट से लेकर पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में मिलने वाला स्ट्रीट फूड तक, हर जगह खाने के दीवानों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यह लोकप्रियता और खान-पान का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
2 जनवरी 2026 को दिल्ली ने फूड डिलीवरी के क्षेत्र में एक नया रिकॉर्ड बनाया, जब एक ही मिनट में 1336 बिरयानी के ऑर्डर दिए गए। जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने इस मांग को देखते हुए दिल्ली के एक स्थानीय रेस्टोरेंट को शहर के टॉप 10 बिरयानी विक्रेताओं में शामिल किया।
दूसरी ओर, इस उद्योग को नियमों की सख्ती का भी सामना करना पड़ा है। 2 मई 2026 को नगर निगम (MCD) ने उत्तम नगर में कई दुकानों पर कार्रवाई की, जिसके तहत 'दिल्ली दरबार' जैसे ब्रांड से मिलती-जुलती दुकानों समेत कई बिरयानी और खाने-पीने की दुकानों को सील कर दिया गया। एमसीडी ने दस्तावेजों की कमी और रिहायशी इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से फूड बिजनेस चलाने का हवाला दिया, जिससे स्थानीय मजदूरों और दुकानदारों पर असर पड़ा।
दिल्ली के अलावा अन्य जगहों पर भी सरकारी नीतियों में बदलाव देखने को मिले हैं। 6 मई 2026 को लखनऊ में 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOC) योजना से बिरयानी और कबाब को बाहर किए जाने की खबरें सामने आईं। इस कदम से स्थानीय लोगों में असंतोष देखा गया और पारंपरिक खान-पान की पहचान को बढ़ावा देने में सरकारी भूमिका को लेकर बहस छिड़ गई।