दिल्ली में भारी छूट पर बिक रहे घी पर छापेमारी, 322 किलो मिलावटी घी जब्त
दिल्ली फूड सेफ्टी विभाग ने भारी छूट पर बिक रहे घी पर छापेमारी कर 322 किलो घी जब्त किया है। लैब रिपोर्ट के बाद होगी कानूनी कार्रवाई।

त्योहारी सीजन की आहट के साथ ही दिल्ली के बाजारों में सस्ते और डिस्काउंटेड सामानों की बाढ़ आ गई है। लेकिन क्या यह सस्ता सामान आपकी सेहत के लिए सुरक्षित है? इसी संदेह को लेकर दिल्ली सरकार के फूड सेफ्टी विभाग ने एक बड़ा अभियान चलाया है। इस दिल्ली फूड सेफ्टी ड्राइव के दौरान अधिकारियों ने उन दुकानों को निशाना बनाया जो 'बाय वन गेट वन फ्री' या 60 प्रतिशत तक की भारी छूट दे रहे थे। इस कार्रवाई में विभाग ने कुल 322 किलोग्राम घी जब्त किया है।
विभाग की टीम ने 23 और 24 अक्टूबर को सघन चेकिंग की। इस दौरान हस्टल गांव से 246 किलोग्राम और विकासपुरी से 75.53 लीटर घी जब्त किया गया। जांच के दायरे में मैक्सकार्ट स्टोर और अग्रवाल स्टोर जैसे प्रतिष्ठान आए। अधिकारियों ने श्री शान, वृंदा फार्म्स और अवतार जैसे ब्रांड्स के सैंपल लिए हैं, जिन्हें अब लैब भेजा गया है। लैब रिपोर्ट आने के बाद ही इन दुकानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इन ब्रांड्स पर भी गिरी गाज
यह अभियान केवल अभी शुरू नहीं हुआ है, बल्कि इससे पहले 17 अक्टूबर के आसपास भी चेकिंग की गई थी। उस दौरान हरियाणा लाइट, हरियाणा सुप्रीम, हरियाणा डेयरी, हरियाणा प्योर, श्री हरियाणा किंग, श्री हरियाणा फूड्स, करतार, प्रभास, मधु संगम, राधा कृष्णा, न्यू पंजाब सुपर ब्रांड, अक्षरा, आनंद गोल्ड, श्री नंदन, श्री मोहन और श्री कृष्णा जैसे कई ब्रांड्स को 'असुरक्षित' पाया गया था। वहीं नोवा, गोवर्धन प्योर काउ घी और प्रताप देसी घी को 'सबस्टैंडर्ड' यानी निम्न श्रेणी का माना गया।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने केवल घी ही नहीं, बल्कि आजाद मार्केट के साहिब संस, लाजपत नगर के जैन स्टोर और रिठाला के युग बास्केट प्राइवेट लिमिटेड से चीनी वाली मिठाइयां, मखाना, हल्दी पाउडर और बिस्कुट के सैंपल भी लिए हैं। इन जगहों पर नियमों की अनदेखी और कमियों को रिकॉर्ड किया गया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं करेगी और खाद्य सुरक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे खरीदारी करते समय पैकेजिंग, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट की अच्छी तरह जांच करें। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजारों, स्टोरेज केंद्रों और ऑनलाइन सप्लायर्स पर कड़ी नजर रखें ताकि दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके।