दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: यमुना किनारे बनेगी 4.7 किमी लंबी दीवार, ₹622 करोड़ का प्लान मंजूर
दिल्ली सरकार ने यमुना के किनारे 4.7 किमी लंबी दीवार बनाने और ₹622 करोड़ के बाढ़ नियंत्रण प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।

राजधानी दिल्ली को मानसून के दौरान आने वाली बाढ़ और जलभराव की समस्या से बचाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने 622 करोड़ रुपये की दिल्ली बाढ़ नियंत्रण योजना को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भारी बारिश के दौरान यमुना के उफनते पानी को रिहायशी इलाकों और सड़कों में घुसने से रोकना है।
इस योजना पर अंतिम मुहर सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री परवेश वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 40वीं बैठक के दौरान लगाई गई। इस पूरी योजना का सबसे अहम हिस्सा एक मजबूत आरसीसी (RCC) दीवार का निर्माण है, जिसे बनाने में करीब 99 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह दीवार 4.7 किलोमीटर लंबी होगी और इसकी ऊंचाई छह से सात फीट के बीच रखी जाएगी। यह सुरक्षा दीवार मैगजीन रोड ड्रेन से लेकर पुराने रेलवे पुल तक के संवेदनशील इलाके में बनाई जाएगी, ताकि पानी के तेज बहाव को रोका जा सके।
बायोमाइनिंग प्रोजेक्ट्स और विशेषज्ञों की राय
बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ सरकार ने ड्रेनेज सिस्टम से निकलने वाली गाद (silt) के वैज्ञानिक निपटान के लिए 260 करोड़ रुपये के तीन बायोमाइनिंग प्रोजेक्ट्स को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी है। यह पूरा खाका अगस्त 2024 में जॉइंट फ्लड कमेटी की सिफारिशों और पुणे स्थित सेंट्रल वॉटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन के हाइड्रोलिक मॉडलिंग डेटा के आधार पर तैयार किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि यह पूरा बुनियादी ढांचा 2027 के मानसून सीजन से पहले तैयार हो जाए।
हालांकि, जहां प्रशासन इसे आपदा प्रबंधन के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताई है। 'साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम, रिवर्स एंड पीपल' के भीम सिंह रावत जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पक्की दीवारों से यमुना के मैदानी इलाकों (floodplains) और भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) की प्राकृतिक प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ सकता है।