दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: बाढ़ से बचाव के लिए ₹622 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

दिल्ली सरकार ने बाढ़ से बचाव के लिए ₹622 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिसमें यमुना के किनारे सुरक्षा दीवार का निर्माण शामिल है।

Kittu Kumari24 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: बाढ़ से बचाव के लिए ₹622 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

राजधानी दिल्ली को मानसून के दौरान होने वाली तबाही और जलभराव से बचाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सचिवालय में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को आयोजित फ्लड कंट्रोल बोर्ड की 40वीं बैठक में 622 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई है। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री परवेश सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शहर की ड्रेनेज प्रणाली को मजबूत करने और बाढ़ सुरक्षा दीवार बनाने पर जोर दिया गया है।

यमुना के किनारे बनेगी सुरक्षा दीवार और होगा बायोमाइनिंग का काम

इस पूरे प्लान का सबसे अहम हिस्सा यमुना नदी के किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी एक आरसीसी (RCC) सुरक्षा दीवार का निर्माण है। करीब 99 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह दीवार 6 से 7 फीट ऊंची होगी, जो मैगजीन रोड ड्रेन से लेकर पुराने रेलवे ब्रिज तक फैलेगी। सरकार का मकसद सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट और यमुना बाजार जैसे निचले इलाकों को बाढ़ के पानी से बचाना है, क्योंकि 2022, 2023 और 2025 में यहां भारी जलभराव देखा गया था।

दीवार के अलावा, सरकार ने 260 करोड़ रुपये की लागत वाले तीन बायोमाइनिंग प्रोजेक्ट्स को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके जरिए नजफगढ़ ड्रेन जैसे नालों से निकाली गई गाद (silt) का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाएगा। मंत्री परवेश सिंह ने साफ किया कि अगर निकाली गई गंदगी का सही प्रबंधन नहीं हुआ, तो वह दोबारा नालों में चली जाएगी और सफाई का कोई फायदा नहीं होगा। इसके साथ ही नदी के किनारों को खूबसूरत बनाने के लिए ग्रीन बेल्ट, वॉकवे और लाइटिंग की व्यवस्था भी की जाएगी।

हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। 'साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल' (SANDRP) के भीम सिंह रावत और यमुना सत्याग्रह के दीवान सिंह का कहना है कि यह दीवार नदी के प्राकृतिक बहाव को रोक सकती है और पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा सकती है। जानकारों ने चेतावनी दी है कि इससे ग्राउंडवाटर रिचार्ज में बाधा आएगी और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने मांग की है कि निर्माण से पहले इलाके का विस्तृत सर्वे कराया जाना चाहिए।

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