CEC विरोध प्रदर्शन: दिल्ली-फरीदाबाद बॉर्डर पर सुरक्षा सख्त, ट्रैफिक जाम से लोग परेशान

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित एक विरोध मार्च के चलते दिल्ली-फरीदाबाद बॉर्डर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। इस सुरक्षा घेरे और वाहनों की गहन चेकिंग की वजह से बॉर्डर पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे फरीदाबाद और दिल्ली के बीच सात प्रमुख रूट बुरी तरह प्रभावित हुए। हजारों लोग सड़कों पर फंसे रहे और उन्हें अपनी मंजिल तक पहुँचने में घंटों की देरी का सामना करना पड़ा।
इस पूरे हंगामे की शुरुआत तब हुई जब INDIA गठबंधन, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और AISA ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकालने का फैसला किया। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी के प्रभाव में काम कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए अपना विरोध जताते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
मेट्रो स्टेशन बंद और ट्रेनें रद्द, आम जनता की बढ़ी मुश्किलें
विरोध प्रदर्शन का असर केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी दिखा। CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के कारण वॉयलेट लाइन के सात मेट्रो स्टेशनों—जामा मस्जिद, जनपथ, आईटीओ, दिल्ली गेट, खान मार्केट, जंगपुरा और लाजपत नगर—की एंट्री और एग्जिट शाम 6 बजे तक बंद रखी गई। इसके अलावा, फरीदाबाद से गुजरने वाली सात ट्रेनें रद्द कर दी गईं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हुई।
प्रशासन ने इस स्थिति से निपटने के लिए पहले ही तैयारी कर ली थी। पिछले चार दिनों से राजनीतिक हस्तियों और झंडे लगी गाड़ियों पर नजर रखी जा रही थी। यहाँ तक कि होटलों और गेस्ट हाउसों को निर्देश दिए गए थे कि वे प्रदर्शन के लिए आने वाले लोगों को ठहराने से बचें। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सुबह 6 बजे से ही शहर के 30 प्रमुख जंक्शनों और सड़कों के लिए एडवाइजरी जारी कर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया था।
सुरक्षा व्यवस्था के बीच कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया गया। AAP के राज्य सह-सचिव भीम यादव सहित कई नेताओं को नजरबंद किया गया, जबकि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दिग्गजों को हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं। पूरे दिन बॉर्डर और शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिस का कड़ा पहरा रहा।