दिल्ली में कैंसर को Notifiable Disease बनाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एक्सपर्ट्स का समर्थन

Kittu Kumari12 August 20261 min read127 viewsDelhi Local
दिल्ली में कैंसर को Notifiable Disease बनाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एक्सपर्ट्स का समर्थन

दिल्ली के कैंसर विशेषज्ञों ने राजधानी में कैंसर को notifiable disease घोषित करने का जोरदार समर्थन किया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें 19 राज्यों और Union Territories (UTs) को कैंसर के मामलों की रिपोर्टिंग अनिवार्य करने पर विचार करने को कहा गया है। इस पहल का उद्देश्य देश भर में early detection और patient care को बेहतर बनाना है।

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और PIL

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने mandatory cancer reporting के लिए एक uniform national policy की जरूरत पर जोर दिया है। कोर्ट ने Central government से भी सवाल किया कि सभी राज्यों और UTs के लिए mandatory guidelines क्यों नहीं हैं। यह judicial intervention AIIMS, New Delhi के पूर्व डॉक्टर अनुराग श्रीवास्तव द्वारा दायर एक Public Interest Litigation (PIL) के बाद सामने आया है।

विशेषज्ञों की राय और आंकड़े

डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने कहा कि nationwide notification से high-burden areas की पहचान करने और prevention को मजबूत करने में मदद मिलेगी। ज्योतिस्ना गोविल ने National Cancer Registry Program के लिए uniform definitions और reporting standards की आवश्यकता पर बल दिया। वर्तमान में भारत के 36 राज्यों और UTs में से 17 ने कैंसर को notifiable disease का दर्जा दे दिया है, जिसे दिल्ली ने अभी तक नहीं अपनाया है।

केंद्र सरकार का पक्ष

Union Ministry of Health and Family Welfare (MoHFW) ने कहा है कि health एक state subject है। मंत्रालय ने यह भी तर्क दिया कि कैंसर एक non-communicable, non-contagious chronic condition है, जो Epidemic Diseases Act, 1897 या National Disaster Management Act, 2005 के तहत notifiable diseases के framework में फिट नहीं बैठती। केंद्र ने 'unsustainable ex-gratia compensation liabilities' को लेकर भी चिंता जताई थी।

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