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Delhi EV Policy 2.0: दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों के लिए भारी सब्सिडी और चार्जिंग नेटवर्क का ऐलान

Kittu Kumari30 July 20263 min read22 views
Delhi EV Policy 2.0: दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों के लिए भारी सब्सिडी और चार्जिंग नेटवर्क का ऐलान

दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए स्थानीय सरकार ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी बड़ा करने का फैसला किया है। दिल्ली में इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाने को बढ़ावा देने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का दायरा बढ़ाने के लिए सरकार ने नया और शानदार 'Delhi EV Policy 2026' (जिसे EV Policy 2.0 भी कहते हैं) लागू कर दिया है। यह नई पॉलिसी आधिकारिक तौर पर 1 जुलाई 2026 से लागू हो गई है और 31 मार्च 2030 तक वैध रहेगी। इस पॉलिसी का मुख्य लक्ष्य 31 मार्च 2030 तक दिल्ली के कुल वाहनों में से कम से कम 30 प्रतिशत वाहनों को इलेक्ट्रिक करना है।

दिल्ली और NCR के लोग अब इस बदलाव को साफ देख सकेंगे क्योंकि सरकार ने अगले चार सालों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए ₹15,000 करोड़ का बड़ा निवेश तय किया है।

कड़े नियम और रजिस्ट्रेशन की नई समय-सीमा

नई गाइडलाइंस के तहत, दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (तिपहिया वाहन) और N1-कैटेगरी के ट्रक ही रजिस्टर्ड किए जाएंगे। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (दोपहिया वाहन) का रजिस्ट्रेशन होगा। इस पॉलिसी का एक अहम हिस्सा एक मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना है, जिसका लक्ष्य शहर भर में 32,000 पब्लिक चार्जिंग पॉइंट बनाना है। जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में लगभग 2,300 नए पब्लिक चार्जिंग पॉइंट लगाने का प्लान है, और 2026 के अंत तक इनकी कुल संख्या 16,000 से ज्यादा होने की उम्मीद है।

Delhi Transco Limited (DTL) को पब्लिक EV चार्जिंग और बैटरी-स्वापिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग और लागू करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसमें BRPL, BYPL और TPDDL जैसी मुख्य बिजली वितरण कंपनियां (DISCOMs) पूरा सहयोग कर रही हैं। इसके अलावा, Original Equipment Manufacturers (OEMs) के लिए अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे हर डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन जरूर बनाएं।

भारी सब्सिडी और आकर्षक छूट

EV अपनाने की रफ्तार को और तेज करने के लिए, इस पॉलिसी में कई बड़ी रियायतें दी जा रही हैं। इसमें पहले साल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए ₹30,000 तक, थ्री-व्हीलर के लिए ₹50,000, और N1 कमर्शियल ट्रकों के लिए ₹1 लाख तक की सब्सिडी शामिल है। जिन इलेक्ट्रिक कारों की एक्स-शोरूम कीमत ₹30 लाख तक है, उन्हें रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पर 100% छूट मिल रही है। जो लोग अपने BS-IV या पुराने वाहनों को बदलकर नई इलेक्ट्रिक कार ले रहे हैं, उन्हें ₹1 लाख तक का स्क्रैपिंग इंसेंटिव भी मिल रहा है। हालांकि, हाइब्रिड वाहन इन सब्सिडी के लिए योग्य नहीं हैं।

Delhi Electricity Regulatory Commission (DERC) ने कम-टेंशन (low-tension) सप्लाई के लिए चार्जिंग टैरिफ ₹4.5 प्रति kWh और हाई-टेंशन (high-tension) सप्लाई के लिए ₹4 प्रति kVAh तय किया है। साथ ही, हाल ही में एक निर्देश आया है कि PM e-Drive स्कीम के तहत अपस्ट्रीम EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च उपभोक्ताओं की बजाय चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स उठाएंगे।

चार्जिंग सुविधाओं में सुधार के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम

भले ही सरकार की योजनाएं बहुत बड़ी हैं, लेकिन जुलाई 2026 के आखिर तक EV चालकों का कहना था कि मौजूदा चार्जिंग सुविधाएं अभी उम्मीद के मुताबिक नहीं हैं। इस विकास को और आसान बनाने के लिए, नई EV पॉलिसी में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स के लिए एक सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम भी शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य राजधानी में तेजी से नए चार्जिंग पॉइंट बनाने के काम को हरी झंडी देना है।

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