दिल्ली पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने वन्यजीव और पारिस्थितिकी के लिए 10 साल का मास्टर प्लान लॉन्च किया

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को वन्यजीव संरक्षण, इकोसिस्टम बहाली और राष्ट्रीय राजधानी के ग्रीन कवर के विस्तार के लिए एक व्यापक 10-वर्षीय मास्टर प्लान की घोषणा की। इस नई पहल का उद्देश्य दिल्ली में वन्यजीवों की रक्षा करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है। यह कदम दिल्ली सरकार द्वारा हाल ही में अपनाई गई लंबी अवधि की पारिस्थितिक रणनीतियों पर आधारित है, जिसमें 2035 तक चलने वाला असोला भट्टी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के लिए 10 साल का कंजर्वेशन प्लान और 2036-37 तक प्रभावी 10 साल का फॉरेस्ट वर्क प्लान शामिल है (दिल्ली सरकार)।
ग्रीन एक्शन प्लान और वृक्षारोपण अभियान
व्यापक पारिस्थितिक ढांचे में 2026-27 का ग्रीन एक्शन प्लान शामिल है, जो पूरी दिल्ली में 70 लाख पेड़, झाड़ियाँ और बांस की बाड़ लगाने का लक्ष्य रखता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा परिकल्पित इस हरित प्रयास में 'वन महोत्सव 2026' ड्राइव शामिल है, जो विशेष रूप से वायु गुणवत्ता में सुधार और मूल जैव विविधता सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली रिज को 15 लाख पेड़ आवंटित करती है (एएनआई न्यूज़)। सरकार के अनुसार, इन पौधों की जीवित रहने की दर 97-99% है, और सटीक निगरानी के लिए हर पौधे और साइट की जियोटैगिंग की गई है।
वैज्ञानिक प्रबंधन और एजेंसियों का सहयोग
वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए, देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ने लॉन्ग-टर्म फॉरेस्ट प्लान तैयार किया है, जिसके तहत प्रोसोपिस जुइलोफ्रा, यूकेलिप्टस और ल्यूकेना ल्यूकोसेफला जैसी आक्रामक प्रजातियों को व्यवस्थित रूप से हटाकर उनकी जगह स्वदेशी वनस्पतियों को लगाना अनिवार्य किया गया है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने असोला भट्टी सैंक्चुअरी के रोडमैप को तैयार करने में मदद की, जो आवास बहाली, टिकाऊ इको-टूरिज्म और मानव-पशु संघर्ष को कम करने पर जोर देता है। इन प्रयासों को पीडब्ल्यूडी, डीडीए, एमसीडी और दिल्ली मेट्रो जैसे विभागों को शामिल करते हुए एक बहु-एजेंसी दृष्टिकोण द्वारा समर्थित किया जाता है ताकि शहर के समग्र पारिस्थितिक स्वास्थ्य को बढ़ाया जा सके।