दिल्ली में बिजली सब्सिडी के लिए आधार अनिवार्य, अब पोर्टल पर देनी होगी जानकारी

दिल्ली सरकार ने बिजली बिलों में मिलने वाली सब्सिडी के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। अब घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए अपना आधार नंबर देना अनिवार्य होगा। सरकार ने आधार अधिनियम 2016 की धारा 7 के तहत यह अधिसूचना जारी की है, जिसे दिल्ली गजट में प्रकाशित किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब सब्सिडी का लाभ 'ऑटोमैटिक' तरीके से नहीं मिलेगा, बल्कि इसके लिए उपभोक्ताओं को खुद को रजिस्टर करना होगा।
इस नई व्यवस्था के तहत, लाभार्थियों को सरकार द्वारा जल्द ही शुरू किए जाने वाले एक वेब पोर्टल पर अपना आधार नंबर दर्ज करना होगा। जिन लोगों के पास अभी आधार कार्ड नहीं है, वे अपने 14 अंकों के आधार नामांकन आईडी (Enrolment ID) का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऊर्जा विभाग फिलहाल इस पोर्टल को तैयार करने और नई गाइडलाइन्स को अंतिम रूप देने में जुटा है। इस पूरी प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा नवंबर में की जाएगी, तब तक पुरानी सब्सिडी व्यवस्था जारी रहेगी।
पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े को रोकने की तैयारी
ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस कदम का मुख्य उद्देश्य सब्सिडी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और केवल असली लाभार्थियों तक मदद पहुँचाना है। सरकार का मानना है कि इससे उन संपन्न लोगों की पहचान हो सकेगी जो सब्सिडी के हकदार नहीं हैं, साथ ही उन 'डॉरमेंट' (निष्क्रिय) खातों पर भी लगाम लगेगी जिनमें लंबे समय से बिजली की खपत शून्य है। दरअसल, ऐसे निष्क्रिय खातों के फिक्स्ड चार्ज के कारण सरकार को सालाना करीब 50 से 60 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ता है।
इस बदलाव को लेकर BSES राजधानी पावर, BSES यमुना पावर, टाटा पावर डीडीएल, NDMC और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES) जैसी वितरण कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाएं।
सब्सिडी का मौजूदा गणित:
- 200 यूनिट तक: बिजली बिल पूरी तरह माफ (जीरो बिल)।
- 201 से 400 यूनिट: 50% सब्सिडी, जिसकी अधिकतम सीमा 800 रुपये है।
- 400 यूनिट से अधिक: कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी।
आंकड़ों की बात करें तो 2025-26 के दौरान दिल्ली के लगभग 87% घरेलू उपभोक्ताओं (करीब 55 लाख लोग) ने इस योजना का लाभ उठाया। बिजली सब्सिडी पर खर्च होने वाला बजट भी काफी बढ़ा है, जो फरवरी 2026 तक 4,037.63 करोड़ रुपये तक पहुँच गया था। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 3,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।