दिल्ली में बिजली सब्सिडी के लिए आधार हुआ अनिवार्य, अब ऐसे मिलेगा लाभ

दिल्ली सरकार ने शहर के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब बिजली सब्सिडी योजना का लाभ उठाने के लिए दिल्ली बिजली सब्सिडी आधार वेरिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया गया है। बिजली विभाग द्वारा जारी एक औपचारिक अधिसूचना के अनुसार, यह नियम 9 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और धोखाधड़ी को रोकना है, ताकि एक ही कनेक्शन पर कई बार सब्सिडी का दावा न किया जा सके।
इस नई व्यवस्था के तहत, जिन उपभोक्ताओं के पास आधार कार्ड है, उन्हें सरकारी वेब पोर्टल या अन्य निर्धारित माध्यमों से अपनी डिटेल्स जमा करनी होंगी। वहीं, जिन लोगों के पास अभी तक आधार नंबर नहीं है, वे अपने 14 अंकों के एनरोलमेंट आईडी (Enrolment ID) का उपयोग करके आवेदन कर सकते हैं। सरकार जल्द ही एक 'ऑप्ट-इन' मैकेनिज्म भी शुरू करने वाली है, जिसकी घोषणा नवंबर 2026 में होगी। इसके बाद सब्सिडी केवल उन्हीं लोगों को मिलेगी जिन्होंने अपना आधार सत्यापन पूरा कर लिया होगा। साथ ही, जो लोग आर्थिक रूप से सक्षम हैं और सब्सिडी नहीं चाहते, उनके लिए 'ऑप्ट-आउट' करने का विकल्प भी रखा गया है।
बढ़ता खर्च और CAG की रिपोर्ट बनी वजह
इस फैसले के पीछे सब्सिडी पर बढ़ता सरकारी खर्च एक बड़ी वजह माना जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019-20 में यह खर्च 2,405.59 करोड़ रुपये था, जो 2022-23 तक बढ़कर 3,161 करोड़ रुपये हो गया और फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा 4,037.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अगस्त 2026 में आई CAG की रिपोर्ट में भी इस योजना में कई खामियों का जिक्र किया गया था। इसी को देखते हुए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
सितंबर 2026 तक दिल्ली में करीब 73 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से लगभग 55 लाख (87%) लोगों ने पिछले साल सब्सिडी का लाभ उठाया था। इस पूरी प्रक्रिया को BSES राजधानी, BSES यमुना, टाटा पावर, NDMC और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES) जैसी वितरण कंपनियों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। प्रशासन ने इन एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस नए नियम का व्यापक प्रचार करें ताकि कोई भी पात्र उपभोक्ता लाभ से वंचित न रहे।