दिल्ली वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन में अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर दिखा सबसे ज्यादा उत्साह, लाखों नाम बाहर होने का खतरा

दिल्ली में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया का डोर-to-door चरण 17 अगस्त 2026 को पूरा हो गया है। इसके सामने आए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के अल्पसंख्यक बहुल विधानसभा क्षेत्रों में वोटर verification की दर सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इन इलाकों में कम्युनिटी अवेयरनेस अभियानों के कारण verification का यह आंकड़ा काफी मजबूत रहा है।
प्रमुख आंकड़े और वेरिफिकेशन दर
- सीलमपुर में सबसे ज्यादा 76.6% verification दर्ज किया गया।
- मटिया महल में 75.5%, बाबरपुर में 72.9% और मुस्तफाबाद में 71.9% verification रहा।
- पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान में 67.3% और चांदनी चौक में 60.9% verification दर्ज हुआ।
- इसके विपरीत, पॉश विधानसभा क्षेत्रों में verification का प्रतिशत कम रहा, जिसमें आरके पुरम में 44.5% और कस्तूरबा नगर में 44% दर्ज किया गया। अल्पसंख्यक बहुल ओखला क्षेत्र में माइग्रेशन की अधिक दर के कारण यह 54.6% रहा।
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कुल रजिस्टर्ड वोटर और ड्राफ्ट रोल प्रकाशन
पूरी दिल्ली में, लगभग 1.45 करोड़ रजिस्टर्ड मतदाताओं में से करीब 97.5 लाख (67.2%) ने अपने enumeration फॉर्म जमा किए हैं। परिणाम स्वरूप, लगभग 33% मतदाता यानी करीब 47.6 से 47.9 लाख वोटर अपने विवरण वेरिफाई करने में असफल रहे हैं। ये सभी मतदाता आगामी ड्राफ्ट electoral roll से बाहर होने के खतरे का सामना कर रहे हैं, जिसका प्रकाशन 24 अगस्त 2026 को तय किया गया है।
गैर-वेरिफाइड वोटरों के लिए आगे की प्रक्रिया
चुनाव अधिकारियों ने बताया कि वेरिफिकेशन न होने का मुख्य कारण वोटरों का पता बदलना, मौत होना, डुप्लीकेट एंट्रियां होना या Booth Level Officers द्वारा उनका न मिल पाना है। दक्षिण पूर्व दिल्ली जिले में सबसे कम डिजिटाइजेशन दर 56.32% दर्ज की गई। ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन के बाद, मतदाताओं के पास 24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 तक claims और objections दर्ज कराने की अवधि होगी। इसके बाद 27 अक्टूबर 2026 को final electoral roll का प्रकाशन किया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट से नाम हटना स्थायी रूप से बाहर होना नहीं है, और योग्य मतदाता निर्धारित समय-सीमा के दौरान दोबारा आवेदन कर सकते हैं।