दिल्ली वोटर लिस्ट रिवीजन: दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए बचे केवल 3 दिन

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के लिए केवल तीन दिन शेष हैं। 30 अक्टूबर तक अपनी दावेदारी और आपत्तियां दर्ज कराएं।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली वोटर लिस्ट रिवीजन: दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए बचे केवल 3 दिन

अगर आप दिल्ली के निवासी हैं और अपनी मतदाता सूची (Voter List) में नाम जुड़वाना चाहते हैं या किसी गलती को सुधारना चाहते हैं, तो आपके पास समय बहुत कम है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली वोटर लिस्ट रिवीजन के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर, 2026 है। अब आपके पास इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल तीन दिन शेष रह गए हैं।

बता दें कि यह विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया 30 जून, 2026 से शुरू हुई थी, जिसके बाद 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई। चुनाव आयोग की टीमें लगातार फील्ड वेरिफिकेशन कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंतिम सूची पूरी तरह सटीक हो। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के अनुसार, अब तक 33.14 लाख लोगों को विसंगतियों के संबंध में नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें से 94.34% यानी करीब 31.26 लाख लोगों के मामलों को सुलझा लिया गया है और उन्हें अंतिम सूची में शामिल करने की मंजूरी मिल गई है।

नए वोटर रजिस्ट्रेशन और सुधार की प्रक्रिया

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इस अभियान के दौरान मतदाताओं में काफी उत्साह देखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त से 26 अक्टूबर के बीच कुल 2,67,441 नए आवेदन (फॉर्म 6) प्राप्त हुए हैं। इसके लिए मतदान केंद्रों और शिक्षण संस्थानों में विशेष कैंप भी लगाए गए थे।

जो लोग अभी भी इस प्रक्रिया से नहीं जुड़े हैं, वे निम्नलिखित फॉर्म का उपयोग कर सकते हैं:

  • फॉर्म 6: नए मतदाता के रूप में नाम जुड़वाने के लिए।
  • फॉर्म 7: किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए।
  • फॉर्म 8: वोटर आईडी में सुधार या बदलाव के लिए।

महत्वपूर्ण बात यह है कि बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर वेरिफिकेशन कर रहे हैं, इसलिए मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। शेष 1.88 लाख लंबित मामलों को 30 नवंबर, 2026 तक निपटाने का लक्ष्य है, जिसके बाद 4 दिसंबर, 2026 को दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

हालांकि, कुछ राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने सूची से मनमाने ढंग से नाम हटाने और मृत व्यक्तियों के नाम रहने की आशंका जताई थी, लेकिन चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के सभी प्रमुख निर्णय आयोग के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

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