दिल्ली में चुनाव आयोग का बड़ा कदम, 33 लाख से अधिक मतदाताओं को भेजे गए सत्यापन नोटिस

Kittu Kumari21 September 20263 min read4 viewsDelhi Local
दिल्ली में चुनाव आयोग का बड़ा कदम, 33 लाख से अधिक मतदाताओं को भेजे गए सत्यापन नोटिस

भारतीय निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में मतदाता सूची में सुधार की बड़ी प्रक्रिया के तहत 33 लाख से अधिक मतदाताओं को सिस्टम-जनरेटेड नोटिस जारी किए हैं। यह अभियान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आगामी चुनावों से पहले मतदाता विवरण के सत्यापन और रिकॉर्ड की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत इस प्रक्रिया को शुरू किया है। इस संबंध में रिपोर्टों की पुष्टि 20 सितंबर 2026 को की गई। 31 अगस्त के आसपास प्रकाशित मसौदा मतदाता सूचियों में शामिल लगभग 97.5 लाख मतदाताओं में से लगभग 33.13 लाख मतदाताओं का सत्यापन किया जाना है। इस प्रक्रिया में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और उनके परिवार के सदस्य, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी सहित कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों को नोटिस मिले हैं। इसके अलावा पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू, पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, वर्तमान दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम भी इस सूची में शामिल है।

सत्यापन प्रक्रिया की मुख्य बातें

यह व्यापक अभियान जून 2026 के अंत में 13,000 से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर गणना के साथ शुरू हुआ था। अधिकारियों ने 2002 में किए गए पिछले गहन पुनरीक्षण के डेटा के साथ इसकी मिलान की। निर्वाचन आयोग और दिल्ली सीईओ कार्यालय के अनुसार, जिन लोगों के रिकॉर्ड 2002 की मतदाता सूची से मैप नहीं हुए थे या जिनके व्यक्तिगत डेटा में तार्किक विसंगतियां थीं, उन्हें नोटिस भेजे गए हैं। विसंगतियों के विशिष्ट मामलों में नाम की वर्तनी में अंतर या आयु से संबंधित अंतर शामिल हैं। उदाहरण के लिए, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू को नाम की वर्तनी में त्रुटि के संबंध में नोटिस मिला। 98 वर्षीय पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को अनमैप श्रेणी के तहत चिन्हित किया गया, हालांकि उनके बेटे जयंत का सफलतापूर्वक सत्यापन हो गया। अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे उन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि इन नोटिसों का मतलब नामों का स्वतः विलोपन है। दिल्ली सीईओ कार्यालय ने कहा है कि किसी भी मतदाता को सुने जाने का अवसर दिए बिना कोई नाम नहीं हटाया जा सकता है।

मतदाता सूची संशोधन के लिए दिशा-निर्देश

जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, उन्हें अपने स्थानीय बूथ लेवल अधिकारी या निर्वाचन अधिकारी को सहायक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। अधिकारियों ने इस चल रहे अभ्यास के लिए समयसीमा और आवश्यकताएं तय की हैं। जून से जुलाई 2026 के बीच प्राथमिक घर-घर गणना की गई। अगस्त 2026 के अंत में लगभग 97.5 लाख मतदाताओं वाले मसौदा रोल प्रकाशित किए गए। सितंबर 2026 के दौरान नोटिस जारी किए गए और उन्हें आधिकारिक सीईओ दिल्ली वेबसाइट तथा जिला पोर्टलों पर उपलब्ध कराया गया। इन नोटिसों के निस्तारण की अंतिम तिथि लगभग 29 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। द इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू, डेक्कन हेराल्ड और पीटीआई जैसे कई स्वतंत्र समाचार संस्थानों ने इन आंकड़ों की पुष्टि की है। निर्वाचन आयोग इस बात पर जोर देता है कि यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है कि कोई भी पात्र नागरिक बाहर न छूटे जबकि सूचियों को अयोग्य प्रविष्टियों से मुक्त रखा जाए। नागरिक अपनी स्थिति सत्यापित करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। इन नोटिसों के समाधान के बाद, अंतिम प्रकाशित सूचियां राजधानी के लिए मान्य मतदाता आधार को दर्शाएंगी।

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