दिल्ली चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन में भेदभाव का आरोप, आम जनता परेशान

Kittu Kumari8 October 20261 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन में भेदभाव का आरोप, आम जनता परेशान

दिल्ली में वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अब विवादों के घेरे में आ गया है। शहर के मतदाताओं के बीच इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में वीआईपी और आम नागरिकों के लिए अलग-अलग पैमाने अपनाए जा रहे हैं। आरोप है कि जहां रसूखदार लोगों के लिए प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया गया है, वहीं आम आदमी कागजों के बोझ तले दबा हुआ है।

मामला यह है कि कई लोगों का दावा है कि प्रभावशाली व्यक्तियों और वीआईपी लोगों को उनके घर बैठे पंजीकरण और सत्यापन (वेरिफिकेशन) की सुविधा मिल रही है। यानी उनके लिए 'डोरस्टेप सर्विस' उपलब्ध है, जिससे उनका काम बिना किसी भाग-दौड़ के तुरंत हो जा रहा है। लेकिन जब बात एक साधारण मतदाता की आती है, तो उसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

आम मतदाताओं के लिए मुश्किल हुई प्रक्रिया

आम जनता की शिकायत है कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या सुधार करवाने के लिए उन्हें भारी-भरकम दस्तावेजों के बंडल लेकर एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस भटकना पड़ रहा है। नौकरशाही की जटिलताओं के कारण लोग मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह का 'दोहरा सिस्टम' न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।

लोगों का मानना है कि जब चुनाव आयोग का मकसद हर पात्र नागरिक को वोट देने का अधिकार दिलाना है, तो प्रशासनिक बोझ केवल आम जनता पर ही क्यों डाला जा रहा है? इस असमानता ने अब एक बड़े सार्वजनिक विमर्श का रूप ले लिया है, जिसमें मांग की जा रही है कि वोटर लिस्ट संशोधन की प्रक्रिया को सभी के लिए समान और सरल बनाया जाए।

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