छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि: दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने पीजी मालिकों के साथ की अहम बैठक

Kittu Kumari5 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि: दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने पीजी मालिकों के साथ की अहम बैठक

देश की राजधानी दिल्ली में पढ़ाई करने आने वाले हजारों छात्र पीजी (पेइंग गेस्ट) और किराए के कमरों में रहते हैं। इन छात्रों की सुरक्षा और उनके रहने के हालातों को सुधारने के लिए दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री ने हाल ही में पीजी मालिकों के साथ एक फॉलो-अप मीटिंग की, ताकि छात्रों को एक सुरक्षित और बेहतर माहौल मिल सके।

दरअसल, यह बैठक शिक्षा मंत्री द्वारा छात्रों के साथ की गई पिछली मुलाकात के बाद बुलाई गई थी। छात्रों ने अपनी सुरक्षा और पीजी व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर चिंताएं जताई थीं। मंत्री आशीष सूद ने पीजी मालिकों को स्पष्ट किया कि छात्रों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने मालिकों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया, ताकि छात्रों की शिकायतों का समय पर समाधान हो सके और उनके रहने के वातावरण में सुधार आए।

हाईकोर्ट में याचिका और सुरक्षा पर सवाल

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पीजी सुरक्षा का यह मुद्दा केवल प्रशासनिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि कानूनी गलियारों में भी गूंज रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका (PIL) पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। यह याचिका दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीजीडीएवी कॉलेज के छात्र शिवांश कालिया ने दायर की है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि पीजी, किराए के फ्लैटों और निजी हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की निगरानी के लिए एक समर्पित तंत्र बनाया जाए।

इस याचिका के पीछे की मुख्य वजह सितंबर में सत्य निकेतन में हुआ वह दर्दनाक हादसा है, जिसमें एक इमारत गिरने से पांच छात्रों समेत सात लोगों की जान चली गई थी। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली आने वाले अधिकांश छात्र कॉलेज हॉस्टलों की कमी के कारण निजी पीजी पर निर्भर हैं, लेकिन उनके पास असुरक्षित इमारतों, आग के खतरों, भीड़भाड़ और शोषण जैसी समस्याओं की रिपोर्ट करने के लिए कोई उचित माध्यम नहीं है।

याचिका में सुझाव दिया गया है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर 'छात्र आवास सलाहकार और निगरानी समितियां' बनाई जाएं। साथ ही, एक 24x7 हेल्पलाइन, ईमेल और ऑनलाइन पोर्टल की मांग की गई है, ताकि छात्र अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे अन्य लंबित मामलों के साथ 14 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

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