दिल्ली सरकार ने जारी किया ई-रिक्शा पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट, अब तय होगी वाहनों की संख्या

राजधानी की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने दिल्ली ई-रिक्शा पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य शहरी परिवहन को व्यवस्थित करना है। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने बुधवार को बताया कि इस योजना का मसौदा सार्वजनिक सुझावों के लिए खुला है और 30 दिनों की परामर्श अवधि के बाद सभी सुझावों की समीक्षा कर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
पॉलिसी की मुख्य बातें और नए नियम
नई नीति के तहत दिल्ली में ई-रिक्शा की कुल संख्या को सीमित करने का प्रस्ताव है, जिसके मुताबिक अब शहर में अधिकतम 2.5 लाख ई-रिक्शा ही चल सकेंगे। इस पूरी व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा 'ई-रिक्शा कॉम्प्लायंस सर्टिफिकेट' (ECC) है।
इस नई व्यवस्था के तहत कुछ कड़े नियम लागू किए गए हैं:
- ECC सर्टिफिकेट: सभी मौजूदा ऑपरेटरों को अधिसूचना की तारीख से 90 दिनों के भीतर यह डिजिटल सर्टिफिकेट लेना होगा। यह सर्टिफिकेट दो साल के लिए वैध होगा और एक ड्राइवर को केवल एक ही वाहन के लिए यह सर्टिफिकेट मिल सकेगा।
- सवारी की सीमा: ई-रिक्शा में ड्राइवर के अलावा अधिकतम चार यात्री ही बैठ सकेंगे। यात्रियों का ड्राइवर के बगल में बैठना या खड़े होकर सफर करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
- तकनीकी मानक: ई-रिक्शा की अधिकतम रफ्तार 25 किमी प्रति घंटा और मोटर पावर 2,000 वाट से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- ड्राइवर के लिए नियम: ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस और पब्लिक सर्विस व्हीकल (PSV) बैज होना अनिवार्य है। साथ ही, रिक्शा में ऐसा ऑडियो बजाने पर रोक होगी जिससे जनता को परेशानी हो।
स्वामित्व के नियमों को भी औपचारिक बनाया गया है। दिल्ली का कोई भी निवासी अधिकतम पांच ई-रिक्शा रख सकता है, जबकि कंपनियां, एनजीओ या ड्राइविंग स्कूल जैसे संस्थान 100 तक वाहन रख सकेंगे। खास बात यह है कि जो संस्थाएं 25 या उससे अधिक वाहन संचालित करेंगी, उन्हें 'एग्रीगेटर लाइसेंस' लेना अनिवार्य होगा।