दिल्ली में ई-रिक्शा की मनमानी पर लगेगा लगाम, सरकार ने जारी की नई ड्राफ्ट पॉलिसी

राजधानी की सड़कों पर बेतरतीब ढंग से दौड़ रहे ई-रिक्शों से होने वाली ट्रैफिक जाम और सुरक्षा समस्याओं को देखते हुए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 'दिल्ली ई-रिक्शा (पंजीकरण और संचालन) योजना, 2026' का ड्राफ्ट जारी किया है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य शहर में ई-रिक्शों की संख्या को नियंत्रित करना और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है।
इस प्रस्तावित योजना के तहत अब दिल्ली में ई-रिक्शा चलाने के नियम काफी सख्त होंगे। सभी ई-रिक्शों को ट्रांसपोर्ट वाहनों के रूप में रजिस्टर कराना अनिवार्य होगा। साथ ही, हर चालक को एक डिजिटल ई-रिक्शा अनुपालन प्रमाणपत्र (ECC) लेना होगा। यह सर्टिफिकेट दो साल के लिए वैध होगा, जिसमें गाड़ी का रजिस्ट्रेशन, मालिक की पहचान, ड्राइविंग लाइसेंस, पीएसवी (PSV) बैज, बैटरी अनुपालन और इंश्योरेंस जैसे जरूरी दस्तावेज जुड़े होंगे।
2.5 लाख की लिमिट और मालिकाना हक के नए नियम
इस पॉलिसी की सबसे बड़ी बात यह है कि अब दिल्ली में ई-रिक्शों की कुल संख्या को सीमित कर दिया जाएगा। सरकार ने पूरे शहर के लिए अधिकतम 2.5 लाख ई-रिक्शों की सीमा (कैप) तय की है। एक बार यह संख्या पूरी हो जाने के बाद, जब तक सरकार इस सीमा को नहीं बढ़ाती, तब तक किसी भी नए ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा।
मालिकाना हक को लेकर भी नए नियम तय किए गए हैं:
- दिल्ली का कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत तौर पर अधिकतम 5 ई-रिक्शा रख सकता है।
- कंपनियों, फर्मों, एनजीओ, सहकारी समितियों और ड्राइविंग स्कूलों को अधिकतम 100 वाहनों तक रखने की अनुमति होगी।
- जो ऑपरेटर 25 या उससे अधिक ई-रिक्शों का संचालन करेंगे, उन्हें अब एग्रीगेटर लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
सरकार ने मौजूदा ई-रिक्शा चालकों को राहत देते हुए कहा है कि पॉलिसी फाइनल होने के बाद उन्हें अपनी कमियों को दूर करने और रजिस्ट्रेशन पूरा करने के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा। फिलहाल, दिल्ली सरकार ने आम जनता और संबंधित पक्षों से इस ड्राफ्ट पॉलिसी पर सुझाव और फीडबैक मांगे हैं, जिन्हें 30 दिनों के भीतर जमा करना होगा।