दिल्ली ई-रिक्शा ड्राफ्ट स्कीम 2026: अब तय होगी वाहनों की संख्या, अनिवार्य होगा ECC सर्टिफिकेट

Kittu Kumari20 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली ई-रिक्शा ड्राफ्ट स्कीम 2026: अब तय होगी वाहनों की संख्या, अनिवार्य होगा ECC सर्टिफिकेट

राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाले ई-रिक्शों को अब एक व्यवस्थित दायरे में लाने की तैयारी है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली ई-रिक्शा ड्राफ्ट स्कीम 2026 का मसौदा पेश किया है, जिसका मकसद ई-रिक्शा सेक्टर को रेगुलेट करना और इसे औपचारिक रूप देना है। इस नई योजना के तहत शहर में ई-रिक्शों की कुल संख्या को सीमित करने और सुरक्षा मानकों को सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 30 दिनों के लिए जनता से सुझाव और फीडबैक मांगे हैं।

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, अब पूरे शहर में ई-रिक्शों की अधिकतम संख्या 2.5 लाख तय की जाएगी। साथ ही, सभी ई-रिक्शों के लिए एक डिजिटल 'ई-रिक्शा कॉम्प्लायंस सर्टिफिकेट' (ECC) अनिवार्य होगा। यह सर्टिफिकेट दो साल के लिए वैध होगा और इसे वाहन के साथ-साथ एक अधिकृत ड्राइवर से जोड़ा जाएगा। ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस और पब्लिक सर्विस व्हीकल (PSV) बैज होना जरूरी है। जिन वाहनों का रजिस्ट्रेशन पहले से है, उन्हें स्कीम लागू होने के बाद सर्टिफिकेट लेने के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा।

स्वामित्व की सीमा और संचालन के कड़े नियम

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नई स्कीम में इस बात पर खास जोर दिया गया है कि एक व्यक्ति या संस्था कितने ई-रिक्शा रख सकती है। इसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • व्यक्तिगत स्वामित्व: दिल्ली का कोई भी निवासी अधिकतम 5 ई-रिक्शा ही रजिस्टर करा सकेगा।
  • संस्थाएं: कंपनियां, एनजीओ, ड्राइविंग स्कूल और सहकारी समितियां अधिकतम 100 ई-रिक्शा रख सकती हैं।
  • एग्रीगेटर लाइसेंस: अगर कोई संस्था 25 या उससे ज्यादा ई-रिक्शों का बेड़ा (फ्लीट) चलाती है, तो उसे एग्रीगेटर लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

सुरक्षा को लेकर भी सख्त गाइडलाइंस जारी की गई हैं। ई-रिक्शा की मोटर पावर अधिकतम 2,000 वाट और टॉप स्पीड 25 किमी प्रति घंटा तय की गई है। एक रिक्शा में केवल 4 यात्री और अधिकतम 40 किलो सामान ले जाने की अनुमति होगी। ड्राइवर के बगल में बैठना या खड़े होकर यात्रा करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

नियमों की अनदेखी करने वालों पर भारी कार्रवाई का प्रावधान है। बिना ECC सर्टिफिकेट के रिक्शा चलाने पर वाहन जब्त किया जा सकता है और यदि 15 दिनों के भीतर सर्टिफिकेट पेश नहीं किया गया, तो वाहन को नष्ट किया जा सकता है। इसके अलावा, बैटरी की सुरक्षा और उनके निपटान (डिस्पोजल) के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, इस सेक्टर में नए स्टार्टअप्स और बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली परिवहन विभाग 'गो-दिल्ली फाउंडेशन' (Go-Delhi Foundation) की स्थापना करने जा रहा है, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये का फंड रखा गया है।

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