दिल्ली के दुर्गा पूजा पंडालों में इस बार दिखेगी सुलभता और रचनात्मकता की नई मिसाल

राजधानी दिल्ली में इस साल दुर्गा पूजा का उत्सव सिर्फ भव्यता ही नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की भावना (Inclusivity) के साथ मनाया जा रहा है। 2026 के आयोजनों में खास तौर पर दिव्यांगजनों की सुविधा का ख्याल रखा गया है, ताकि हर कोई बिना किसी बाधा के मां दुर्गा के दर्शन कर सके। इस पहल के तहत पंडालों में रैंप, समतल रास्ते और ब्रेल संकेतों (Braille signage) की व्यवस्था की गई है। साथ ही, दृष्टिबाधित लोगों के लिए मूर्तियों के स्पर्श करने योग्य मॉडल और शांत कमरे (Quiet zones) बनाए गए हैं, ताकि वे सुकून से उत्सव का अनुभव कर सकें।
इन सुविधाओं को लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN), यूनेस्को, पश्चिम बंगाल सरकार और IIT खड़गपुर द्वारा तैयार किए गए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का पालन किया जा रहा है। इन दिशा-निर्देशों के हिंदी संस्करण का औपचारिक शुभारंभ दिल्ली के पंडारा रोड स्थित पूजा पंडाल में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा किया गया। इस मौके पर शहरी विकास और नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल और 'स्वयं' संस्था की संस्थापक स्मिनु जिंदल ने जोर दिया कि त्योहारों का आनंद धर्म, जाति या शारीरिक अक्षमता से परे सबके लिए समान होना चाहिए।
कला और संस्कृति का अद्भुत संगम
सुलभता के साथ-साथ इस बार पंडालों की थीम भी बेहद खास है। कहीं पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता (Sustainability) का संदेश दिया गया है, तो कहीं 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर विशेष श्रद्धांजलि दी गई है। कुछ पंडालों में बंगाली सिनेमा के दिग्गज उत्तम कुमार के शताब्दी वर्ष को समर्पित कलाकृतियां हैं, तो कहीं जूट और बांस के जरिए ग्रामीण बंगाल की झलक दिखाई गई है। इस पूरे प्रयास में 'अंजलि-मेंटल हेल्थ राइट्स ऑर्गनाइजेशन', 'संचार' और 'इंडिया ऑटिज्म सेंटर' जैसी संस्थाओं का सहयोग रहा है।
भीड़ को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 16 अक्टूबर 2026 को एक एडवाइजरी जारी की है। चितरंजन पार्क (CR Park) और ग्रेटर कैलाश-II जैसे इलाकों में शाम 4 बजे से आधी रात तक भारी ट्रैफिक रहने की संभावना है, इसलिए वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे जाम से बचने के लिए दिल्ली मेट्रो का उपयोग करें।