दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी, यात्रियों को भारी परेशानी

दिल्ली में डीटीसी बसों को चलाने वाले निजी चालकों की हड़ताल 19 सितंबर 2026 को चौथे दिन में प्रवेश कर गई है। इस हड़ताल के कारण राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। 15 सितंबर 2026 से शुरू हुई इस हड़ताल की वजह से शहर में आवागमन ठप हो गया है। इस संकट ने बस सेवा की बड़ी कमी को उजागर किया है, क्योंकि 6,631 बसों के बेड़े को संभालने के लिए वर्तमान में केवल 3,908 स्थायी ड्राइवर ही मौजूद हैं। हड़ताल कर रहे चालकों का मुख्य उद्देश्य बेहतर कामकाजी स्थिति और उचित वेतन पाना है।
प्रमुख मांगें और वेतन वृद्धि
चालक वर्तमान दैनिक वेतन 862 रुपये से बढ़ाकर 1,500 से 2,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। यह मांग स्थायी डीटीसी कर्मचारियों के 90,000 से 1 लाख रुपये के मासिक वेतन के करीब लाने के लिए की जा रही है। इसके अलावा, ड्राइवर चिकित्सा लाभ, बीमा कवरेज, ओवरटाइम भत्ता, सवेतन अवकाश, सामाजिक सुरक्षा और वार्षिक बोनस की मांग कर रहे हैं। वे 'समान काम के लिए समान वेतन' के सिद्धांत की वकालत कर रहे हैं और बस क्षति के लिए जुर्माने को समाप्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और बसों की कमी
दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि सरकार चिकित्सा सुविधाओं, छुट्टियों और दुर्घटना मुआवजे की शर्तों पर सहमत हो गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वेतन वृद्धि का मामला अभी श्रम विभाग के विचाराधीन है। न्यूनतम संचालन बनाए रखने के लिए सरकार अनुबंध पर मौजूद अन्य चालकों का उपयोग कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 सितंबर को लगभग 5,600 बसों में से केवल 650 बसें ही सड़कों पर चल पाईं और 5,000 से अधिक गाड़ियां डिपो में खड़ी रहीं।
यात्रियों की समस्याएं और मेट्रो का विकल्प
इस परिवहन व्यवस्था के चरमराने से अनुमानित 40 लाख दैनिक यात्री बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यात्रियों को संभालने के लिए दिल्ली मेट्रो ने 8 लाख अतिरिक्त यात्रियों की भीड़ को देखते हुए 20 फेरे बढ़ा दिए हैं। इस बीच, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने सामान्य किराए से दो से तीन गुना तक अधिक किराया वसूलना शुरू कर दिया है, जिससे यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बस डिपो पर विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ की छिटपुट घटनाओं के बीच डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन नौकरी की सुरक्षा और स्थायी रोजगार की मांग पर डटी हुई है और बातचीत अभी भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।