दिल्ली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 33% वोटर्स के हटने का बड़ा खतरा, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पूरा

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद, लगभग 47.62 लाख वोटर्स के आगामी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटने का खतरा पैदा हो गया है। यह संख्या दिल्ली के कुल 1,45,10,299 इलेक्टोर रेट का करीब 33 प्रतिशत है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) का यह SIR काउंटिंग फेज 30 जून 2026 से 17 अगस्त 2026 तक चलाया गया था। इस दौरान बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) ने घर-घर जाकर वेरिफिकेशन किया और ऑफिशियल पोर्टल पर डेटा अपलोड करने में मदद की, लेकिन केवल 97.47 लाख फॉर्म ही सफलतापूर्वक डिजिटाइज हो सके, जिससे 33 प्रतिशत इलेक्टोर रेट डिजिटाइजेशन प्रक्रिया में अनअकाउंटेड रह गए।
क्षेत्रीय प्रदर्शन और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिकेशन
इस प्रक्रिया में क्षेत्रीय प्रदर्शन में काफी अंतर देखा गया; रोहिणी निर्वाचन क्षेत्र ने 83.43 प्रतिशत के साथ सबसे ज्यादा डिजिटाइजेशन रेट दर्ज किया, जबकि तुगलकाबाद में सबसे कम 52.15 प्रतिशत रहा। चांदनी चौक जैसे माइनॉरिटी-कंसंट्रेटेड एरिया में डिजिटाइजेशन रेट 61.02 प्रतिशत दर्ज किया गया। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का पब्लिकेशन 24 अगस्त 2026 को तय किया गया है। जिन वोटर्स की जानकारी कैप्चर नहीं की गई, उन्हें Absent, Shifted, Dead, or Duplicate (ASDD) कैटेगरी के तहत रखा जाएगा और उन्हें फॉर्मल नोटिस भेजे जाएंगे।
आगे की प्रक्रिया और फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख
इलेक्शन कमीशन के एडिशनल सेक्रेटरी संदीप कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रिवीजन प्रक्रिया की जानकारी सभी मान्यता प्राप्त पॉलिटिकल पार्टीज और पब्लिक तक ट्रांसपेरेंट तरीके से पहुंचाई जाए। संभावित डिलीशन से प्रभावित नागरिक 24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 के बीच नए एड्रेस एनरोलमेंट के लिए फॉर्म-6 सहित क्लेम और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। 2002 SIR डिटेल्स प्रदान करने में विफल रहने वाले वोटर्स को भी 24 अगस्त के बाद नोटिस मिलेंगे। फाइनल वोटर लिस्ट का पब्लिकेशन 27 अक्टूबर 2026 को तय किया गया है, जिसका उद्देश्य केवल एलिजिबल वोटर्स को लिस्ट में रखना है।