दिल्ली में कुत्ते के काटने के सालाना 5.75 लाख मामले, एमसीडी और यूसीएमएस की चौंकाने वाली रिपोर्ट

Kittu Kumari28 September 20262 min read1 viewDelhi Local
दिल्ली में कुत्ते के काटने के सालाना 5.75 लाख मामले, एमसीडी और यूसीएमएस की चौंकाने वाली रिपोर्ट

दिल्ली में कुत्तों के काटने की समस्या लगातार बढ़ रही है। 28 सितंबर 2026 को वर्ल्ड रेबीज डे के मौके पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर साल लगभग 5.75 लाख लोगों को कुत्ते काटते हैं। इस समस्या से सबसे ज्यादा पुरुष प्रभावित हो रहे हैं। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) और यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल Sciences (UCMS) की एक संयुक्त स्टडी में यह बात सामने आई है कि राष्ट्रीय राजधानी में यह दर राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में हर एक हजार में से 25 से 26 लोग हर साल कुत्ते के काटने का शिकार होते हैं। इनमें से 75.5 प्रतिशत मामले आवारा कुत्तों के होते हैं और बाकी पालतू कुत्तों के काटने से जुड़े होते हैं। इस बारे में अधिक जानकारी DD News पर देखी जा सकती है।

एमसीडी के उपाय और अदालत का दखल

इस बढ़ते संकट से निपटने के लिए म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। एमसीडी ने मई 2026 में घोषणा की थी कि अगले दो सालों में 1.2 लाख एंटी-रेबीज वैक्सीन की शीशियां खरीदी जाएंगी। इसके अलावा, 2026-27 के बजट में आवारा कुत्तों की माइक्रोचिपिंग और टीकाकरण के लिए लगभग 35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही, आक्रामक कुत्तों के लिए द्वारका में एक विशेष आश्रय स्थल भी बनाया जा रहा है। ये सभी कदम जुलाई 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा आवारा कुत्ता प्रबंधन दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए शुरू की गई स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (PIL) के बाद उठाए गए हैं।

हाल की घटनाएं और दिशा-निर्देश

शहर में आवारा कुत्तों के हमलों की गंभीरता लगातार सामने आ रही है। हाल ही में 19 सितंबर 2026 को दिल्ली के तिमारपुर इलाके में एक 18 महीने के बच्चे पर कुत्ते ने हमला कर दिया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसे वैश्विक स्वास्थ्य निकायों का लगातार कहना है कि रेबीज के प्रसार को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर कुत्तों का टीकाकरण करना सबसे मुख्य उपाय है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी World Health Organization की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसके अलावा, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने 26 सितंबर 2026 को एक एडवाइजरी जारी की थी। इस एडवाइजरी में राज्यों से एंटी-रेबीज टीकाकरण शिविर आयोजित करने और बढ़ते खतरे से निपटने के लिए पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रमों को मजबूत करने का आग्रह किया गया था।

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