दिल्ली के डॉक्टरों का कमाल: दा विंची 5 रोबोटिक सिस्टम से एक दिन में कीं 5 जटिल कैंसर सर्जरी

द्वारका के मणिपाल अस्पताल में डॉक्टरों ने दा विंची 5 रोबोटिक सिस्टम की मदद से एक ही दिन में 5 जटिल कैंसर ऑपरेशन कर नया कीर्तिमान रचा।

Kittu Kumari31 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली के डॉक्टरों का कमाल: दा विंची 5 रोबोटिक सिस्टम से एक दिन में कीं 5 जटिल कैंसर सर्जरी

दिल्ली के द्वारका स्थित मणिपाल अस्पताल में चिकित्सा विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि देखने को मिली है। यहाँ के डॉक्टरों ने अत्याधुनिक दा विंची 5 रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए महज एक दिन के भीतर पांच बेहद जटिल कैंसर ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह पूरी प्रक्रिया डॉ. सुरेंद्र कुमार डबास के नेतृत्व में संपन्न हुई, जो मणिपाल कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर और ऑनको रोबोटिक सर्जरी (नॉर्थ वेस्ट क्लस्टर) के चेयरमैन हैं।

इन पांचों सर्जरी में अलग-अलग तरह के कैंसर का इलाज किया गया। इनमें 52 वर्षीय एक व्यक्ति की जीभ के कैंसर के लिए 'रोबोटिक नेक डिसेक्शन', 60 वर्षीय महिला के पित्तशय (गॉलब्लैडर) कैंसर के लिए 'रैडिकल कोलेसिस्टेक्टोमी' और 73 वर्षीय व्यक्ति के मूत्राशय (यूरिनरी ब्लैडर) कैंसर के लिए 'रैडिकल सिस्टेक्टोमी' शामिल थी। इसके अलावा, एंडोमेट्रियल कैंसर से पीड़ित 50 और 53 वर्ष की दो महिलाओं की भी रोबोटिक सर्जरी की गई।

तकनीक की सटीकता से आसान हुआ इलाज

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दा विंची 5 सिस्टम अपनी उन्नत क्षमताओं के कारण चर्चा में है। इसमें 150 से ज्यादा डिजाइन सुधार किए गए हैं, जिनमें सबसे खास 'फोर्स फीडबैक' तकनीक है। यह तकनीक सर्जनों को यह महसूस करने में मदद करती है कि नाजुक ऊतकों (tissues) पर कितना दबाव डाला जा रहा है। साथ ही, यह सिस्टम हाई-डेफिनिशन 3D विजुअलाइजेशन और बेहतर इंस्ट्रूमेंट कंट्रोल की सुविधा देता है, जिससे सर्जरी की सटीकता कई गुना बढ़ जाती है।

डॉ. सुरेंद्र कुमार डबास ने बताया कि महत्वपूर्ण अंगों और रक्त वाहिकाओं के पास स्थित ट्यूमर की सर्जरी करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा, "नई तकनीकों के आने से इन जटिल सर्जरी में मरीजों को होने वाला ट्रामा काफी कम हो गया है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि एक ही दिन में पांच अलग-अलग ऑन्कोलॉजिकल प्रक्रियाएं करना इस तकनीक की सटीक नेविगेशन क्षमता को दर्शाता है, जिससे ट्यूमर निकालना आसान हो गया है।

इस रोबोटिक तकनीक का सबसे बड़ा फायदा मरीजों को मिलता है। पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले इसमें चीरे छोटे लगते हैं, खून कम बहता है और ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है, जिससे मरीज बहुत तेजी से रिकवर कर पाते हैं। गौरतलब है कि डॉ. डबास ने इस विशेष सिस्टम की ट्रेनिंग कैलिफोर्निया के इंटुइटीव सर्जिकल और दक्षिण कोरिया के योनसे यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन के सेवरेंस अस्पताल से ली है।

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