दिवाली 2026: दिल्ली में सजे उत्सव के मेले, ग्रीन पटाखों के लिए तय हुए कड़े नियम
दिल्ली में दिवाली 2026 की धूम है। जानें कहां लग रहे हैं मेले और ग्रीन पटाखों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या नियम तय किए हैं।

देश की राजधानी दिल्ली इस समय दिवाली 2026 के जश्न में डूबी हुई है। चारों तरफ रोशनी और रौनक है और शहर के अलग-अलग हिस्सों में शानदार सांस्कृतिक मेलों और बाजारों का आयोजन किया जा रहा है। लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन इस बार उत्सव के साथ-साथ पर्यावरण और नियमों का भी खास ख्याल रखा जा रहा है। दिल्ली दिवाली मेला 2026 के जरिए शहर में हस्तशिल्प और पारंपरिक उपहारों की धूम है।
अगर आप भी खरीदारी और उत्सव का आनंद लेना चाहते हैं, तो बाबा खड़क सिंह मार्ग स्थित स्टेट एम्पोरिया कॉम्प्लेक्स में 'ग्रैंड एक्सपो 2026' चल रहा है, जो 5 नवंबर तक जारी रहेगा। इसके अलावा छतरपुर के नेचर बाजार में 'दस्तकार फेस्टिवल ऑफ लाइट्स', हैंडलूम हाट का दिवाली बाजार, ब्लाइंड स्कूल का वार्षिक मेला और नोएडा हाट दिवाली उत्सव आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सबसे खास आयोजन कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 6 और 7 नवंबर को होगा, जहां सरकार द्वारा आयोजित जश्न में रामायण के दृश्यों को दर्शाने वाला एक भव्य ड्रोन शो पेश किया जाएगा।
पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और समय सीमा
जश्न के बीच प्रशासन का पूरा ध्यान प्रदूषण और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर है। दिवाली की खरीदारी की वजह से सड़कों पर भारी भीड़ देखी जा रही है और GRAP प्रतिबंधों के कारण ट्रैफिक पुलिस अलर्ट पर है। पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR के लिए बहुत सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।
- कौन से पटाखे चलेंगे: केवल CSIR-NEERI और PESO द्वारा प्रमाणित 'ग्रीन पटाखे' ही जलाए जा सकेंगे।
- तारीख और समय: पटाखे केवल 7 और 8 नवंबर को ही जलाए जा सकते हैं। इसके लिए दो समय तय किए गए हैं— सुबह 6:00 से 7:00 बजे तक और रात 8:00 से 10:00 बजे तक।
- क्या है प्रतिबंधित: बेरियम युक्त पटाखों और लड़ियों (joint series) के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक है।
- साइलेंस जोन: अस्पताल, स्कूल, नर्सिंग होम और वृद्धाश्रम जैसे संवेदनशील इलाकों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाना सख्त मना है।
शहरवासियों को यह ध्यान रखना होगा कि 9 नवंबर 2026 से एक बार फिर सभी प्रकार के पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू हो जाएगा। प्रशासन ने अपील की है कि लोग नियमों का पालन करें ताकि उत्सव की खुशी के साथ-साथ हवा की गुणवत्ता भी बनी रहे।