शाहदरा पुलिस से विवाद: दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल बुधवार तक बढ़ी
शाहदरा पुलिस के साथ विवाद गहराने के बाद दिल्ली की सभी सात जिला अदालतों के वकीलों ने बुधवार तक हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।

दिल्ली की सभी सात जिला अदालतों में न्यायिक कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। शाहदरा पुलिस के साथ गहराते विवाद के चलते वकीलों ने अपनी हड़ताल को बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया है। इस विरोध प्रदर्शन की वजह पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच उपजा तनाव है, जिसने अब एक बड़े टकराव का रूप ले लिया है।
पूरे मामले की शुरुआत 23 अक्टूबर 2026 को हुई, जब वकील ललित बंसल के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। इस घटना के बाद वकीलों में भारी आक्रोश था। विवाद तब और बढ़ गया जब 24 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हंगामा हुआ। पुलिस का दावा है कि वकीलों ने वहां सरकारी काम में बाधा डाली और अधिकारियों को धमकाया। वहीं, वकीलों का आरोप है कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने स्टेशन के अंदर ही उन पर सर्विस रिवॉल्वर तानकर धमकी दी थी।
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, वकीलों ने मांगा सस्पेंशन
इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए 26 अक्टूबर को 15 से 20 वकीलों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इनमें सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने और हमला करने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत पर दर्ज इस केस में पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में वकीलों की बदसलूकी साफ दिख रही है।
दूसरी ओर, 'कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली' के सदस्य अमूल्य रतन, नरवीर डबास, विशाल शर्मा और विवेक पांडे का कहना है कि पुलिस ने पहले ललित बंसल पर हमला करने वालों को गिरफ्तार करने का वादा किया था, लेकिन बाद में उन्हें बिना किसी आरोप के छोड़ दिया। वकीलों का आरोप है कि पुलिस अब अपनी गलती छिपाने के लिए उन पर झूठे केस कर रही है।
वकीलों की कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जब तक एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और संबंधित एसएचओ को निलंबित नहीं किया जाता और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी। इस फैसले के कारण अदालतों में लंबित मामलों की सुनवाई पर बुरा असर पड़ रहा है और याचिकाकर्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।