ACP की धमकी और FIR के विरोध में दिल्ली के जिला कोर्ट वकीलों की हड़ताल
दिल्ली के जिला कोर्ट वकीलों ने ACP द्वारा धमकी देने और FIR दर्ज कराने के विरोध में काम बंद किया है। पूरी घटना यहाँ पढ़ें।

दिल्ली की सभी जिला अदालतों में आज सन्नाटा पसरा हुआ है। दिल्ली वकील हड़ताल के चलते कानूनी कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। यह विरोध प्रदर्शन 'कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली' के आह्वान पर किया गया है। मामला शाहदरा पुलिस स्टेशन के एक एसीपी (ACP) पर लगे गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिन्होंने कथित तौर पर वकीलों को धमकाया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी।
इस पूरे विवाद की शुरुआत वकील ललित बंसल के साथ हुई एक घटना से हुई, जिसमें उन्हें सिर में गंभीर चोटें आई थीं। 23 अक्टूबर की शाम को अमूल्य रतन समेत वकीलों का एक समूह शाहदरा पुलिस स्टेशन पहुंचा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उस समय एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और थाना प्रभारी (SHO) ने वकीलों को भरोसा दिलाया कि आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि, जब 24 अक्टूबर को वकीलों को पता चला कि आरोपियों को हिरासत में लेने के बजाय छोड़ दिया गया है, तो वे जवाब मांगने दोबारा थाने पहुंचे।
पुलिस अधिकारी पर रिवॉल्वर दिखाने का आरोप
वकीलों का आरोप है कि जब उन्होंने जांच की जवाबदेही मांगी, तो एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने अपनी रिवॉल्वर निकालकर उन्हें डराने और धमकाने की कोशिश की। मामला यहीं नहीं रुका; 26 अक्टूबर को पुलिस ने शाहदरा बार एसोसिएशन के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर नंबर 0252/2026 दर्ज कर ली। इस कार्रवाई ने कानूनी बिरादरी में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
घटना के तुरंत बाद 26 अक्टूबर को कोऑर्डिनेशन कमेटी की एक आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग हुई। कमेटी ने एक सर्कुलर जारी कर मांग की है कि निष्पक्ष जांच होने तक एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और संबंधित एसएचओ को तुरंत निलंबित किया जाए।
वकीलों ने अपनी इस नाराजगी और शिकायतों को दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, जिला न्यायाधीशों और दिल्ली बार काउंसिल तक पहुंचा दिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि न्याय की मांग करने वाले वकीलों को पुलिसिया डराने-धमकाने का शिकार नहीं होना चाहिए।